जीएसटी पारित करने में विपक्ष शासित राज्य पहल कर रहे हैं लेकिन भाजपा शासित जम्मू कश्मीर में ही इसके पारित होने पर संशय बरकरार है।
पीडीपी ने जीएसटी के वर्तमान स्वरुप को खारिज कर दिया है। बदलाव के साथ इसे रियासत में लागू करने पर सहमति की कोशिश हो रही है।
अगर यह कोशिश सफल होती है तब भी जीएसटी का रियासत विधानसभा में जनवरी से पहले पारित होना संभव नहीं है। इस स्थिति में जीएसटी के कानून में रियासत को कोई योगदान नहीं दे पाएगा।
जम्मू-कश्मीर को अनुच्छेद 370 के तहत मिले हैं विशेष अधिकार
सीएम महबूबा मुफ्ती के साथ डिप्टी सीएम
- फोटो : Amar Ujala
जीएसटी संबंधी कानून के लिए इसे 15 सितम्बर तक अधिकांश राज्यों की विधानसभा से पारित कराया जाना जरूरी है। जम्मू कश्मीर विधानसभा के स्पीकर कवीन्द्र गुप्ता ने कहा कि रियासत विधानसभा का अगला सत्र अब जनवरी में ही होगा।
राज्यसभा से जीएसटी के पारित हो जाने के बाद रियासत के वित्त मंत्री डा. हसीब द्राबू ने इसे खारिज कर दिया था। लेकिन बाद में केंद्र द्वारा रियासत को रियायतों के एलान के बाद उन्होंने नए प्रस्ताव की जरुरत बताई है। डा. द्राबू ने कहा कि जीएसटी के मुद्दे पर रियासत के संवैधानिक अधिकारों को बरकरार रखना जरूरी है।
जम्मू कश्मीर के संविधान के तहत रियासत सरकार को सेवा पर विशेष टैक्स का अधिकार है। जम्मू कश्मीर देश का अकेला राज्य है जिसे सेल्स टैक्स एक्ट के तहत सेवाओं पर कर लगाने का अधिकार है। रियासत को अनुच्छेद 370 के तहत विशेष अधिकार मिले हैं।
रियासत में सीधे लागू नहीं होता संविधान संशोधन
वित्त मंत्री अरुण जेटली और सीएम महबूबा मुफ्ती
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जीएसटी में शामिल होने के लिए संवैधानिक अधिकारों पर ध्यान दिया जाना जरूरी है। इस बाबत केंद्रीय वित्त मंत्री को सूचित कर दिया गया है। संविधान का संशोधन जम्मू कश्मीर पर सीधे लागू नहीं होता है।
जम्मू कश्मीर सरकार ने आशंका जताई है कि वर्तमान स्वरूप में जीएसटी को स्वीकारने पर जीएसटी काउंसिल को टैक्स मामलों में रियासत की विधानसभा से अधिक अधिकार हो जाएंगे। इससे रियासत का विशेष दर्जा प्रभावित हो सकता है।
उद्योगों को दी जाने वाली विशेष रियायतें भी इससे प्रभावित हो सकती हैं। जीएसटी को विपक्ष शासित राज्य हिमाचल प्रदेश, बिहार और दिल्ली में पारित किया जा चुका है। जम्मू कश्मीर में भाजपा और पीडीपी की गठबंधन सरकार है।
प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डा. जीतेन्द्र सिंह का कहना है कि जम्मू कश्मीर के वित्त मंत्री फिलहाल रियासत के कानून को ही बेहतर बता रहे हैं। इस पर बातचीत जरूरी है ताकि जीएसटी को रियासत में भी लागू किया जा सके।