पांच किताबें प्रकाशन के इंतजार में, संदर्शिका में बताई शहर की संस्कृति
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। डोगरी के विकास और उसे आम बोलचाल की भाषा बनाने के लिए 40 साल से लगातार काम हो रहा है। डोगरी साहित्यकारों ने भाषा को और समृद्ध बनाने की दिशा में खूब काम किया। इसी तरह मजबूत शाब्दिक संरचना और भाषा विन्यास को नया रूप देने में छन्नी हिम्मत की डॉ. वीणा गुप्ता जुटी हैं। उनकी पांच पुस्तकें प्रकाशित होने के इंतजार में हैं।
डॉ. गुप्ता बताती हैं कि डोगरी में संस्कृत, उर्दू से कई समान शब्दों को शामिल किया है ताकि बोलते समय आसानी हो। जो शब्द आम बोलचाल में प्रयोग किए जा रहे हैं उसे वैसे ही रहने दिया जाए ताकि भाषा की खूबसूरती बनी रहे। डोगरी में पीएचडी की उपाधि लेने के बाद वह जेयू में विभागाध्यक्ष भी रहीं। इस दौरान उनकी कई पुस्तकें प्रकाशित हुईं जिसमें हिंदी डोगरी वार्तालाप प्रमुख है।
डॉ. वीणा की हिंदी डोगरी वार्तालाप संदर्शिका किताब में शहर की संस्कृति पर्यटकों तक पहुंचाने की कोशिश की गई है। डॉ. गुप्ता ने कहा कि अंग्रेजी में बोले जा रहे शब्द जैसे फ्रिज, टीवी, मोबाइल आदि शब्दों को परिमार्जित करने की जरूरत नहीं है। उनका कहना था कि वह 1970 से डोगरी भाषा पर काम कर रही हैं। व्याकरण को लेकर पहली किताब 1995 में प्रकाशित हुई थी। इसके बाद उद्भव और विकास डोगरी वाक्य विन्यास पर काम किया।
पढ़ाई व शोध के दौरान कई पुस्तकें लिखी
डाॅ. वीणा ने बताया कि उनकी प्राथमिक स्तर पर भाषा विन्यास व व्याकरण की किताबें अब बाजार में नहीं हैं जो जम्मू विश्वविद्यालय के कॉपीराइट में आती हैं। कोशिश यही है कि यह पुस्तकें पुनर्जीवित हो, उसके लिए कॉपीराइट देने की मांग करेंगी। उनकी कुछ प्रमुख पुस्तकों में हिंदी डोगरी कन्वर्जन गाइड, डोगरी वाक्य विन्यास, डोगरी भाषा उद्भव और विकास, डोगरी व्याकरण शामिल है। 44 अन्य पुस्तकों की रचना और कई शोध पत्र प्रकाशित किए जा चुके हैं।
संस्कृत व उर्दू से बने डोगरी शब्द
संस्कृत में पत्र से पत्तर, अग्नि से अग्ग, लघु से लौह्का, कंठिका से कैंठी, समुद्र से समुंदर, शत से सौ, श्वसुर से सौह्रा। इसी तरह उर्दू में इत्तफाक से थवाक, तौफीक से थवीक, लाचार से लचार, लावारिस से लबारस, बेचारा से बचैरा सहित और भी बहुत शब्द हैं। पंजाबी में तैनूं को डोगरी में तुगी, कित्थे को कुत्थै, स्हानूं-असेंगी बोला जाता है। दोनों भाषाओं में हत्थ, कन्न, नक्क, पैर, कम्म, दाल, अग्ग, पानी, दुध, खीर, फल बगैरा समान शब्द हैं।