जम्मू। शहर-गांवों में लावारिस कुत्तों की भरमार है। हर दिन कुत्ता काटने के केस बढ़ रहे हैं। लोग लहूलुहान होते हैं। जबकि जिला स्तर पर अस्पतालों में इलाज नहीं मिल रहा है। कुत्ते के काटने पर जख्म वाले स्थान पर इंजेक्शन से सिरम दिया जाता है। इस सिरम के लिए विभिन्न जिलों से मरीजों को जीएमसी जम्मू रेफर किया जाता है। इससे मरीजों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है।
जम्मू शहर की बात की जाए तो 75 वार्डों में करीब 70 हजार लावारिस कुत्तों की भरमार है। गली मोहल्लों और चौक-चौराहों पर कुत्तों की बढ़ती जनसंख्या से शहरवासियों के लिए मुसीबतें बढ़ी हैं। हर दिन बच्चों को कुत्तों द्वारा काटे जाने की खबरें मिलती हैं। वहीं दुपहिया चालकों के पीछे भी कुत्ते दौड़ पड़ते हैं, जिससे कई बाहर बाइक स्कीट कर गिर जाती है और वाहन सवार घायल हो जाते हैं। जीएमसी जम्मू के रेबीज सेक्शन में प्रतिदिन डॉग बाइट के मामले पहुंच रहे हैं, हालांकि कोविड की दहशत के कारण लोग अस्पतालों में पहुंचने के बजाय निजी क्लीनिकों में उपचार करवा रहे हैं। वहीं जिला स्तर के अस्पतालों में सिरम उपलब्ध न होने के कारण मरीजों को मजबूरन जीएमसी आना पड़ रहा है। कोविड महामारी के बीच जीएमसी में प्रतिदिन 40 से 50 डॉग बाइट के मामले पहुंच रहे हैं, इसमें कई फालोअप के मामले होते हैं। वहीं सूत्रों के मुताबिक इतने ही मामले निजी क्लीनिकों में भी पहुंच रहे हैं।
कई अस्पतालों में सिरम उपलब्ध नहीं
संभाग में जीएमसी कठुआ, जीएमसी राजोरी और जीएमसी डोडा भी खोले गए हैं। लेकिन कहीं भी सिरम उपलब्ध नहीं है। कुत्ते के काटने पर जख्म वाले स्थान पर इंजेक्शन से सिरम दिया जाता है। इसके बाद 0-3-7-28 दिन के अंतराल में त्वचा में इंजेक्शन से वैक्सीन दी जाती है। जीएमसी में मरीजों को सिरम और वैक्सीन निशुल्क मुहैया करवाई जा रही है, लेकिन जिला स्तर के पीड़ितों के लिए दिक्कतें बरकरार हैं।
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प्रत्येक जिले में नोडल ऑफिसर तैनात कर एंटी रेबीज सेक्शन खोलने की योजना बनाई गई थी। लेकिन, कोरोना के कारण योजना अधर में लटक गई। इसलिए जिला स्तर से सिरम के लिए मरीज जम्मू रेफर किए जा रहे हैं। जल्द ही योजना फिर शुरू की जाएगी।
डॉ. दिनेश गुप्ता, एचओडी, पीएसएम विभाग, जीएमसी