बचपन से ही सेना में शामिल होना चाहते थे कैप्टन बृजेश थापा
कैप्टन बृजेश थापा ने डोडा ऑपरेशन में वीरगति को प्राप्त किया। जानकारी के अनुसार, वह पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी के दूसरे पीढ़ी के अधिकारी थे। गढ़वाल राइफल्स के अपने पिता कर्नल बी थापा (सेवानिवृत्त) से प्रेरित होकर वह ओटीए चेन्नई से सेना में शामिल हुए। बचपन से ही वह अपने पिता की तरह सेना में रहना चाहते थे और हमेशा आगे बढ़कर नेतृत्व करने में विश्वास करते थे। वह आर्मी एयर डिफेंस में थे। युवा कैप्टन बृजेश ने डोडा में आगे बढ़कर नेतृत्व किया और पहाड़ की चोटी पर आतंकवादियों को रोके रखा। उन्होंने भारतीय सेना के तीन अन्य जवानों के साथ सर्वोच्च बलिदान दिया।
सैनिकों के बलिदान का बदला जल्द लेंगे- उपराज्यपाल
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने डोडा मुठभेड़ में बलिदान हुए सेना और पुलिस के जवान के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि सैनिकों की शहादत का बदला जरूर लेंगे।
उपराज्यपाल ने कहा, 'डोडा जिले में हमारे सेना के जवानों और जेकेपी कर्मियों पर हुए कायरतापूर्ण हमले के बारे में जानकर मुझे गहरा दुख हुआ है। हमारे देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले बहादुर सैनिकों को श्रद्धांजलि। शोक संतप्त परिवारों के सदस्यों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं।'
कहा, 'हम अपने सैनिकों की मौत का बदला लेंगे और आतंकवादियों और उनके सहयोगियों के नापाक मंसूबों को नाकाम करेंगे। मैं लोगों से आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में एकजुट होने और हमें सटीक जानकारी प्रदान करने का आह्वान करता हूं ताकि हम आतंकवाद विरोधी अभियानों को तेज कर सकें और आतंकी पारिस्थितिकी तंत्र का अंत कर सकें।'