जीएमसी की इमरजेंसी में गत शनिवार को एक मरीज की मौत पर मेडिसन के रजिस्ट्रार डा. सुशील पंडिता को निलंबित किए जाने के मामले में जूनियर डाक्टरों ने जीएमसी प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। डाक्टरों ने अस्पताल की सप्लाई में ग्लूकोज, ड्रिपसेट सहित अन्य दवाइयों की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए जांच करवाने की मांग की है। घटिया स्तर की दवाइयों से मरीजों को रिएक्शन हो रहे हैं, जिसका सारा दोष डाक्टरों पर मड़ा जा रहा है।
यहां रविवार को पत्रकारों से रूबरू होते हुए रेजीडेंट डाक्टर एसोसिएशन जीएमसी के प्रधान डा. नीरज शर्मा ने कहा कि गत दिवस रिएक्शन के मामले में बिना जांच के रजिस्ट्रार को निलंबन करना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाए पिछले दो साल से अस्पताल में ग्लूकोज और ड्रिपसेट से रिएक्शन के मामलों में बढ़ोतरी हुई है। इसके लिए विभागीय उच्चाधिकारियों को भी कई बार अवगत कराया गया है, मगर कुछ नहीं किया गया है।
दवाइयों की गुणवत्ता को लेकर कोई जांच नहीं हो रही है। उन्होंने आरोप लगाए कि इमरजेंसी जैसे यूनिट में जीवनरक्षक दवाइयों का भारी अभाव बना हुआ है। लोगों को बाजार से दवाइयां खरीदने के लिए कहा जाता है। ऐसे में तीमारदारों के सामने डाक्टर निशाना बन रहे हैं। आधुनिक ट्रालियों का अभाव है। उन्होंने गुलाम नबी आजाद द्वारा दी गई ट्रालियों को अभी इमरजेंसी में स्थापित करने पर भी सवाल उठाए और कहा कि इन्हें पहले क्यों नहीं मरीजों के लिए लगाया गया।
मरीजों और तीमारदारों के लिए उचित पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है। इमरजेंसी में आम मरीजों को छोड़कर वीआईपी के लिए दवाइयां उपलब्ध करवाई जा रही हैं। उन्होंने रजिस्ट्रार के निलंबन को वापस लेने के साथ दवाइयों की जांच के लिए एक हफ्ते का अल्टीमेटम दिया। इस मौके पर डा. दीपक भारती, डा. संजीव शर्मा, डा. जुल्फीकार अली मौजूद रहे।