पाक रेंजरों की गोलाबारी से सीमावर्ती ग्रामीण जब तब हताहत होते रहे हैं। गांव फलोरा के ग्रामीण रोशन लाल उन्हीं में से एक हैं, जो सीमा पार की नापाक हरकत के दौरान अपना एक पैर गंवा बैठे। मोर्टार के शेल की चपेट में क्या आए, उनकी दिनचर्या ही बदल गई। रोशन लाल को अपनी मिट्टी से बेपनाह प्यार है।
उन्हें एक पैर गंवाने का भी उतना गम नहीं। वह आहत हैं, तो सरकार की उपेक्षा से, जिसने उनकी अब तक सुध नहीं ली। 24 अगस्त 2014 को रोशन लाल घर के बरामद में बैठे थे कि पाकिस्तान की ओर से दागे गए मोटार्र का शेल उनके पास आकर गिरा। उनकी एक टांग में छर्रे लग गए। इससे वह गंभीर घायल हो गए।
जम्मू मेडिकल कालेज में उपचार के दौरान दो चेक देकर सरकार ने 53 हजार रुपये की राशि उपचार के लिए मुहैया करवाई गई थी। वहीं इलाज के लिए पर्याप्त रुपये नहीं होने के चलते सही उपचार नहीं हो सका और अस्पताल द्वारा घर भेज दिया गया। बाद में सगे संबंधियाें से रुपये उधार लेकर अमृतसर के गैर सरकारी अस्पताल में दो माह तक रहा।
बाद में हालत गंभीर होने पर एक पैर कटवानी पड़ी। इस दौरान पांच लाख रुपये की राशि का खर्च उठाना पड़ा। रोशन लाल ने बताया कि पाक फायरिंग के चलते उस समय भैंस भी चपेट में आई थी। लेकिन सरकार ने सुध तक नहीं ली। नेताओं ने राहत राशि और एक सदस्य को नौकरी देने का वादा किया था। आज तक उसी उम्मीद पर है।