हाईकोर्ट ने राज्य में खड्ड की बिक्री और खड्ड में निर्माण करने पर रोक लगा दी। पंजीकृत सोसायटी कैलाश असिस्टो ओशनिक द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह फैसला दिया। सोसायटी के बलबीर सिंह की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि जल संसाधन एक्ट 2010 को लागू करने में सरकार पूरी तरह नाकाम रही है। साथ ही याचिका में कहा गया है कि तवी नदी के किनारे कुछ लोगों द्वारा अवैध कब्जे कर लिए गए हैं।
याचिकाकर्ता ने तवी किनारे बसाई गई गुज्जर नगर कालोनी की मिसाल भी दी है। याचिकाकर्ता का कहना है कि तवी को सूर्य पुत्री नदी के रूप में जाना जाता है। तवी नदी किनारे बने जोगी गेट में हिंदू समुदाय के लोग मृतकों का अंतिम संस्कार करते हैं और इसके बाद पवित्र जल से स्नान करते हैं। लेकिन नदी किनारे सिद्दड़ा पुल से लेकर निकी तवी तक हुए अवैध निर्माणों के चलते इन कालोनियों से निकलने वाले गंदे पानी की तवी नदी में निकासी होती है जिससे नदी का पानी गंदा हो रहा है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि तवी नदी का पानी गंदा होने से एक विशेष समुदाय के लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं। याचिकाकर्ता की ओर से अपील की गई कि इस सब पर रोक लगानी होगी। चीफ जस्टिस एमएम कुमार और जस्टिस ताशी रबस्तान की डिवीजन बेंच ने याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट में पेश हुए एडवोकेट अभिनव शर्मा की दलीलों को सुनने के बाद इस
मामले में मुख्य सचिव तथा अन्य को नोटिस जारी किए। साथ ही बेंच ने जल संसाधनों के आसपास के इलाकों में किसी तरह के निर्माण और जमीन की बिक्री पर भी रोक लगा दी।