कश्मीर हिंसा के दौरान सुरक्षा बलों की कार्रवाई में मारे गए पत्थरबाजों के लिए 5 लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा के बाद इसे लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। पर पाकिस्तान की गोलाबारी से बार्डर पर मारे गए ग्रामीणों के परिवारों को बढ़ा मुआवजा अब तक नहीं मिल पा रहा है।
केंद्र सरकार ने बार्डर और एलओसी पर सीजफायर के उल्लंघन के क्रम में मारे जाने वाले ग्रामीणों के लिए मुआवजे की राशि एक लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये कर दी है। केंद्रीय कैबिनेट के फैसले के बाद केंद्र ने इसे अधिसूचित भी कर दिया है लेकिन, पीड़ितों के परिवारों को पुराने दर पर ही मुआवजा दिया गया है। रियासत में सत्ताधारी गठबंधन में शामिल भाजपा में इस मुद्दे को लेकर रोष है।
गृह मंत्रालय के दस्तावेजों के अनुसार सर्जिकल स्ट्राइक के बाद और उससे पहले इस साल बार्डर और एलओसी पर पाकिस्तान द्वारा 437 बार सीजफायर का उल्लंघन किया गया। पाकिस्तान ने एलओसी पर 216 बार और बार्डर पर 221 बार गोलाबारी की। इसमें इस साल 12 ग्रामीण मारे गए और 80 घायल हुए।
'रियासत में अभी इसे लागू किया जाना बाकी'
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इस क्रम में सेना के 8 और बीएसएफ के 5 जवान शहीद हुए। घायल जवानों की संख्या 99 है। पाकिस्तानी गोलों से इस साल 111 मकान ध्वस्त हुए हैं। तीन साल में गोलाबारी में 42 ग्रामीण और 31 जवान शहीद हुए हैं।
मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने विधानसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह स्वीकार किया है कि केंद्र ने एक नई योजना अधिसूचित की है। इसके तहत बार्डर पर फायरिंग में मारे जाने वाले लोगों के परिवारों को 5 लाख रुपये दिए जाने का प्रावधान है। उत्तर में कहा गया है कि रियासत में अभी इसे लागू किया जाना बाकी है।
महबूबा ने कहा है कि इस साल बार्डर और एलओसी पर 12 लोग फायरिंग में मारे गए। इनके परिवारों को 12 लाख (एक लाख प्रति परिवार), घायलों को 3 लाख 90 हजार और क्षतिग्रस्त ढांचों के लिए 2 लाख 39 हजार रुपये का मुआवजा दिया गया।
केंद्र के फैसले को लागू करे रियासत सरकार : डॉ. जितेंद्र सिंह
डॉ. जितेंद्र सिंह
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने अमर उजाला से कहा कि उन्होंने बार्डर पर पाकिस्तान की गोलाबारी से मारे जाने वाले लोगों का मुआवजा बढ़ाने के बारे में पहल की। प्रधानमंत्री इससे सहमत हुए और इस पर केंद्रीय कैबिनेट ने मुहर लगाई। अब रियासत की जिम्मेदारी है कि वह इसे लागू करे।
यह जम्मू-कश्मीर की बड़ी समस्या है कि आतंकी गतिविधियों में मारे जाने वालों को 5 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाता है और पाकिस्तान की गोली से मरने वालों के परिवार सिर्फ एक लाख पाते हैं। केंद्र के फैसले के बाद अब रियासत सरकार पीड़ित परिवारों को 5 लाख रुपये का मुआवजा दे और उसकी प्रतिपूर्ति केंद्र से कराए।