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अलगाववादी नेता गिलानी के पोते को नौकरी मामले ने पकड़ा तूल

Sun, 05 Mar 2017 01:48 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला/जम्मू
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अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी - फोटो : File Photo
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कट्टरपंथी अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी के पोते अनीस उल इस्लाम को कश्मीर हिंसा के दौरान नियमों की अनदेखी कर नौकरी दिए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। विपक्षी नेकां और कांग्रेस ने सरकार पर हमला बोला है।
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हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि अनीस की रिसर्च आफिसर पद पर नियुक्ति में पूरी प्रक्रिया का पालन किया गया है। घाटी में स्थित शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (एसकेआईसीसी) विवादों में आ चुका है।

एसकेआईसीसी प्रबंधन पर आरोप है कि इनके द्वारा गिलानी के पोते अनीस-उल-इस्लाम को नौकरी प्रदान करने के लिए न सिर्फ रिसर्च ऑफिसर की पोस्ट बनाई गई, बल्कि उसे नौकरी पर रखने के लिए नियमों की अनदेखी की गई। आरोप यह भी है कि अनीस के लिए इस नौकरी का इंतजाम खुद मुख्यमंत्री कार्यालय ने कराया। इसके लिए पर्यटन विभाग के कमिश्नर सेक्रेटरी ने यह पोस्ट बनवाई और अनीस की नियुक्ति करवाई। 
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'सभी जरूरी नियमों का पालन हुआ'

नौकरी के लिए सभी जरूरी नियमों का पालन हुआ - फोटो : डेमो फोटो
एसकेआईसीसी प्रबंधन ने सभी आरोपों को सिरे से नकारा है। एसकेआईसीसी के प्रवक्ता शाहनवाज अहमद के अनुसार इस नौकरी के लिए सभी जरूरी नियमों का पालन हुआ है। उनके अनुसार अक्टूबर के महीने में नौकरी का विज्ञापन चार अखबारों में दिया गया था।

इसके बाद 196 उम्मीदवारों के आवेदन मिले थे, जिनमें से 35 को इंटरव्यू के लिए शॉर्ट लिस्ट किया गया। 32 उम्मीदवारों ने नवंबर के महीने में इंटरव्यू दिया। शाहनवाज ने बताया इनमें से अनीस पहले नंबर पर आया और उसे नौकरी पर रखा गया। उन्होंने बताया कि दो दिन पहले ही अनीस को जम्मू-कश्मीर पुलिस की तरफ से भी क्लीन-चिट मिल गई है।

जम्मू-कश्मीर में सरकारी नौकरी के लिए सीआईडी की क्लियरेंस सर्टिफिकेट मिलना जरूरी है जिस का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि उम्मीदवार आतंकी, अलगाववादी या उनका समर्थक तो नहीं। पुलिस की तरफ से भी क्लियरेंस मिलने के बाद अब उसे वेतन भी मिलना शुरू हो जाएगा जो क्लियरेंस न मिलने के चलते बंद था।
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विपक्ष ने महबूबा मुफ्ती पर साधा निशाना

महबूबा मुफ्ती - फोटो : File Photo
इस मामले के सामने आते ही विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। नेशनल कांफ्रेंस के प्रवक्ता जूनाइड मट्टू ने बताया कि मौजूदा सरकार में यह बात सामने आ रही है कि मुख्यमंत्री महबूबा के इशारों पर उनके अधिकारी हाई प्रोफाइल पोस्टों को भरने के लिए बैक डोर भर्तियां करवा रहे हैं।

इस मामले की जांच होनी चाहिए, चाहे इसके लिए कोर्ट में भी जाना पड़े। कहा कि सरकार को ऐसे मामलों में जवाबदेह बनना होगा। गिलानी को जवाब देना चाहिए कि जब कश्मीर में हिंसा के दौरान स्कूल बंद करवाए गए, यह कहा गया कि सरकारी नौकरियां प्राथमिकता नहीं तो उस समय उनके घर में ऐसी नौकरियां प्राप्त करना पोते के लिए प्राथमिकता कैसे बन गई। पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी ट्वीट कर इस मामले को निंदनीय करार दिया है।      

महबूबा मुफ्ती के सलाहकार सुहेल बुखारी ने इस मामले पर सरकार की ओर से कहा कि इस नियुक्ति में किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं किया गया बल्कि नियुक्ति में पारदर्शिता बरती गई है। सभी आरोप बेबुनियाद हैं और इन्हें बिना वजह मुद्दा बनाया जा रहा है। 
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