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Jammu News: आपदा राहत और पुनर्वास के लिए खर्च होंगे 200 करोड़

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सीएम ने सभी उपायुक्तों को जिले में 10 करोड़ खर्च करने के दिए निर्देश
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-बोले-अधिकारियों की पहली प्राथमिकता लोगों के जीवन की सुरक्षा, निरंतर संवाद बनाएं अधिकारी

अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। प्रदेश सरकार ने आपदा और राहत बचाव कार्य के लिए 200 करोड़ रुपये जारी किए हैं। तत्काल राहत और पुनर्वास के लिए सभी उपायुक्त दस-दस करोड़ रुपये खर्च पाएंगे। यह धनराशि जिलों में मानसून की वजह से हुए नुकसान पर खर्च होगी। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बुधवार को अधिकारियों की समीक्षा बैठक के दौरान यह निर्देश दिए।
प्रदेश में बीते दिनों बादल फटने और बाढ़ आने की घटना से किश्तवाड़, कठुआ और जम्मू समेत अन्य जिलों में नुकसान पहुंचा है। उपायुक्त सरकार से मिली इस धनराशि को राहत और बचाव कार्य में खर्च किया जा सकता है।
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मुख्यमंत्री बाढ़ के हालात का जायजा लेने के बाद बुधवार को सिविल सचिवालय जम्मू में अधिकारियों की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा, तवी नदी का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ आई है और इससे जानमाल का नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा, अधिकारियों की पहली प्राथमिकता लोगों के जीवन की सुरक्षा के लिए हर संभव उपाय करने की है। उन्होंने कहा, लोगों से निरंतर संवाद बनाए रखने की आवश्यकता है। उन्होंने अधिकारियों को बाढ़ आने के बाद उच्च सतर्कता बरतने की सलाह दी है।
इससे पहले आपदा प्रबंधन पर आयोजित बैठक में मौजूद जम्मू संभाग के विधायकों ने राहत और पुनर्वास कार्य तेज करने की बात कही। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आवश्यक सेवाएं बहाल करने के निर्देश दिए हैं। इससे पहले सीएम श्रीनगर से आए और भगवती नगर क्षतिग्रस्त पुल, गुज्जर नगर सहित अन्य प्रभावित इलाकों में हालात जाने।

बैठक में क्या बोले भाजपा विधायक
प्रशासन को बनाना होगा प्लान : सेठी
जम्मू सदर के भाजपा विधायक युद्धवीर सेठी ने कहा, बाढ़ से लोगों को नुकसान हुआ है। सड़कें टूट गई हैं, लोग अपने घरों से पलायन कर गए हैं। इनके लिए राहत का प्लान बनाना होगा। उन्होंने कहा, बाढ़ से लोगों के घरों को नुकसान हुआ है। कई लोगों के रहने और खाने का इंतजाम नहीं हो पा रहा है। सरकार और प्रशासन को इस ओर भी ध्यान देना होगा।

राहत के लिए कदम उठाने की जरूरत : गुप्ता
विधायक अरविंद गुप्ता ने कहा, बाढ़ की वजह से विधानसभा क्षेत्र के डेढ़ हजार लोग प्रभावित हुए हैं। भवनों को नुकसान पहुंचा है। लोगों के घरों में कीचड़ और पानी भर गया था। इनके लिए राहत के कदम उठाने की आवश्यकता है। उन्होंने इस बारे में अपना सुझाव दिया है। उन्होंने कहा, 70 प्रतिशत इलाकों में बिजली और पानी का संकट बना हुआ है। लोगों को भोजन उपलब्ध करवाने की आवश्यकता है।




-धरातल की मंजिल में घुसा पानी, सहमे लोगों ने ऊपरी मंजिलों पर गुजारी रात

-मुख्यमंत्री बोले-पहले राहत और बचाव अभियान चलेगा, फिर नुकसान का होगा आकलन

अमर उजाला ब्यूरो

जम्मू। तवी के उफान से आई बाढ़ के ठीक 24 घंटे बाद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला जम्मू पहुंचे। उन्होंने तवी तट पर बसे इलाकों में पहुंच कर हालात का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने बुधवार को भगवती नगर और गुज्जर नगर समेत अन्य इलाकों में लोगों से बातचीत की है। गुज्जर नगर में लोगों ने मुख्यमंत्री को बताया कि उन्होंने मेहनत से जो कमाया था तवी की बाढ़ में बर्बाद हो गया है। मंगलवार को चेतावनी की वजह से लोग सजग थे। लेकिन तवी के उफान पर आने की वजह से पानी लोगों के घरों में दाखिल हो गया। लोग जान बचाने के लिए घर की ऊपरी मंजिलों में चले गए। लेकिन अफरा-तफरी में ज्यादातर सामान अंदर ही छूट गया। लोग मुख्यमंत्री के सामने बोले मंगलवार की रात लोगों ने डरते हुए गुजारी है।

मुख्यमंत्री के सामने स्थानीय लोगों ने राहत के तौर पर बिजली और पानी को दुरुस्त करने की बात कही है। साथ ही मलबे से हुए नुकसान की भरपाई का भी आह्वान किया है।

मुख्यमंत्री ने यहां विभागों, प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों को राहत कार्याें में जुटने और प्रभावित परिवारों की मदद के लिए कदम उठाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री भगवती नगर में क्षतिग्रस्त पुल का भी मुआयना किया और गुज्जर नगर समेत दूसरी जगहों पर लोगों का हाल जाना। उन्होंने तवी के बहाव और पुल के टूटने को लेकर मंडलायुक्त जम्मू से जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने चेतावनी के बावजूद सड़क और संचार माध्यमों की तैयारी न करने पर नाराजगी जाहिर की है।
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भगवती नगर में मंगलवार को तवी के तेज बहाव से पुल टूट गया था। जिस समय यह हादसा हुआ पुल पर वाहन आवाजाही कर रहे थे। पुल पर मौजूद गाड़ियां भी हादसे की भेंट चढ़ गई हैं। पुल टूटने के बाद गाड़ियां खिसक कर तवी में जा गिरी हैं। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस क्षेत्र के बार-बार प्रभावित होने की भी बात कही। उन्होंने इससे पहले आई बाढ़ के दौरान भी पुल को नुकसान पहुंचने की बात कही। प्रदेश सरकार जम्मू में बाढ़ के आतंक को खत्म करने पर विशेषज्ञों की राय लेगी और इसके आधार पर भविष्य में कदम उठाए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से बातचीत के दौरान जम्मू क्षेत्र में बार-बार आ रही बाढ़ पर चिंता जताई है। इससे पहले 2014 में इस तरह की आफत का सामना स्थानीय लोगों को करना पड़ा था। अब इसके बाद एक बार फिर हालात ने जम्मू को नौ साल पहले वाली स्थिति में धकेल दिया है।
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