जम्मू-कश्मीर के सरकारी अस्पतालों का जल्द डिजिटलाइजेशन किया जा रहा है। इसमें जिला, सामुदायिक चिकित्सा केंद्र (सीएचसी) और प्राइमरी चिकित्सा केंद्र (पीएचसी) स्तर पर विभिन्न मॉड्यूल के तहत डिजिटल सेवाएं शुरू की जाएंगी। इसमें मरीजों को ओपीडी (आउट पेशेंट डोर), आईपीडी (इंडोर पेशेंट डोर), लेबोरेटरी, दवा स्टोर, ब्लड बैंक, एक्सरे, रिकॉर्ड, चिकित्सा उपकरण आदि सेवाओं को डिजिटल करके मरीज का रिकॉर्ड एक जगह रखा जाएगा, ताकि दूसरी बार मरीज के अस्पताल पहुंचने पर उनके स्वास्थ्य इतिहास का जल्द पता करके उचित चिकित्सा दी जा सके।
आठ मॉड्यूल के तहत शुरू होंगी डिजिटल सेवाएं
इसके साथ ओपीडी के दौरान डिजिटल पर्ची में मरीज का मोबाइल नंबर और पता लिया जाएगा, जिससे एसएमएस आदि माध्यम से उसका फीडबैक लिया जाएगा। यह सारी प्रक्रिया अस्पताल प्रबंधन सूचना तंत्र (एचएमआईएस) के तहत की जा रही है। जिला अस्पताल में आठ मॉड्यूल के तहत डिजिटल सेवाएं शुरू की जाएंगी, जिसमें ओपीडी, आईपीडी, लेबोरेटरी, स्टोर, दवा, रिकॉर्ड आदि को डिजिटल किया जाएगा।
प्रदेश में कितने हैं जिला अस्पताल
प्रदेश में बीस जिलों में बीस जिला अस्पताल स्थापित हैं, जिसके साथ अन्य एक्सीडेंटल आदि जिला स्तर के अस्पतालों को भी डिजिटल किया जा रहा है। इसी तरह सीएचसी स्तर पर चार मॉड्यूल में डिजिटल सेवाएं शुरू की जा रही हैं। प्रदेश में 79 सीएचसी स्थापित हैं, जबकि पीएचसी स्तर पर एक मॉड्यूल के तहत डिजिटल सेवा होगी। इसमें सबसे अधिक 50 से 700 की संख्या के बीच पीएचसी केंद्र डिजिटल होंगे।
क्या होगा इसका लाभ
डिजिटलाइजेशन चिकित्सा सेवाओं का उद्देश्य मरीज का स्वास्थ्य रिकॉर्ड अस्पतालों के पास रखकर भविष्य में उन्हें जरूरत पर जल्द चिकित्सा सेवाएं मुहैया करवाना है। अभी तक अगर एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में इलाज के लिए कोई मरीज जाता है तो उसका डॉक्टरी पर्ची के आधार पर अलग इलाज शुरू किया जाता है।
वर्तमान में मरीज का कोई डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, लेकिन एचएमआईएस प्रणाली से स्वास्थ्य रिकॉर्ड को जुटाकर मरीज को वास्तविक समय में उचित चिकित्सा सुविधाएं मुहैया करवाई जा सकेंगी। सूत्रों के अनुसार स्वास्थ्य विभाग की ओर से चार सौ कंप्यूटरों की खरीद की गई है, जिन्हें जिला स्तर पर डिजिटलाइजेशन के लिए भेजा जा रहा है।