युवा तेजी से डायबिटीज (मधुमेह) की चपेट में आ रहे हैं। असंतुलित खानपान, मोटापा और तनाव से डायबिटीज की शिकायत बढ़ी है। अब डायबिटीज वयस्कों की बीमारी न रहकर बीस साल के युवाओं की भी सेहत बिगाड़ रही है। शहरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी डायबिटीज मरीजों की संख्या बढ़ी है। जीएमसी में विभिन्न यूनिटों में पहुंचने वाला हर चौथा और पांचवां व्यक्ति डायबिटीज से पीड़ित होता है।
14 नवंबर को सन 1921 में इंसूलीन की खोज करने वाले नोबल पुरस्कार विजेता डा. फेडरिक बेंटिंग की जयंती पर विश्व डायबिटीज दिवस मनाया जा रहा है। डायबिटीज विशेषज्ञ डा. राज कुमार के अनुसार कई शोधों में पता चला है कि युवाओं को डायबिटीज से पीड़ित करने में तनाव मुख्य भूमिका निभा रहा है। चाहे वे आतंकवाद, बेरोजगारी, घरेलू हिंसा या अन्य कारण हों।
रियासत में एक बड़े प्रतिशत में लोगों को यह ही नहीं पता है कि वे डायबिटीज से पीड़ित हैं। इसी तरह जम्मू और श्रीनगर में सुरक्षा बलों में भी ऐसे कई शोध किए गए, जिसमें पाया गया कि ड्यूटी में अधिक व्यस्तता और तनाव से कई जवान मधुमेह का शिकार हुए हैं। विस्थापन की पीड़ा भी डायबिटीज के लिए एक बड़ा कारण रही है। जीएमसी में 20 से 40 साल तक की उम्र के लोग डायबिटीज से पीड़ित होकर पहुंच रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में शरीर से कामकाज लेने के कारण लोग शारीरिक रूप से मजबूत हैं, जिससे वहां डायबिटीज का शिकंजा कम है, लेकिन शहरों में इसके विपरीत युवाओं को तेजी से यह रोग अपनी चपेट में ले रहा है। फास्ट फूड और अन्य खाद्य पदार्थों से अधिक कैलोरी शरीर में जा रही है। शहरी लोगों में शारीरिक व्यायाम काफी कम है।
डायबिटीज टाइप-1 में बच्चे और किशोर आते हैं, जबकि टाइप-2 में सामान्यतया उम्रदराज और मोटे लोगों को डायबिटीज होती है, लेकिन बच्चों और किशोरों में शारीरिक व्यायाम से परहेज करना, प्रतिस्पर्धा के चलते अत्यधिक तनाव में रहना चिंता का विषय है। इन्हीं कारणों से देश के कई हिस्सों में 10-20 साल के बच्चे और किशोर डायबिटीज से पीड़ित हो रहे हैं।
लक्षण
थकावट की शिकायत रहना
बार-बार प्यास लगना
भूख लगकर भी सेहत न बनना
वजन का लगातार गिरते जाना
किसी घाव का जल्दी न भरना
क्या करें
प्रतिस्पर्धा के बीच तनाव को दूर रखें
शारीरिक व्यायाम नियमित रूप से करें
फास्ट फूड का सेवन कम से कम करें
शरीर का सामान्य वजन बनाए रखें