डीजीपी दिलबाग सिंह ने शुक्रवार को श्रीनगर के बख्शी स्टेडियम में 18वें पुलिस मार्टियर्स फुटबॉल टूर्नामेंट का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, आज हम जम्मू-कश्मीर पुलिस के बहादुर जवानों और अधिकारियों को याद कर रहे हैं।
जैसे आतंकवाद से निपटा, उसी तरह नशे की समस्या से भी निपटेंगे। डीजीपी ने कहा, इस टूर्नामेंट में 40 टीमें हिस्सा ले रही हैं। इस तरह के कई कार्यक्रम साल भर जारी रहेंगे। कठुआ में भी क्रिकेट टूर्नामेंट आयोजित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, मैं समझता हूं कि जवानों और खिलाड़ियों को साथ लेकर आयोजित की जाने वाली ऐसी प्रतियोगिताएं समाज में अमन और शांति बनाए रखने में अहम साबित होती हैं। प्रदेश में हालात को लेकर उन्होंने कहा कि यह साल क़ाफी अच्छा रहा है और उम्मीद करते हैं कि आने वाला साल भी बहुत अच्छा रहेगा।
इस बीच टीआरएफ और अन्य आतंकवादी संगठनों द्वारा जारी किए जाने वाले धमकी भरे पत्रों में कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के नाम की सूची सार्वजनिक होने को लेकर डीजीपी ने कहा, ऐसी सूचियां सबसे पहले पब्लिक में वायरल होती है। कहीं न कहीं से ऐसी सूचियों का निकलना कोई बड़ी बात नहीं है।
उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को शर्म आनी चाहिए जो धमकियां देते हैं। क्योंकि यहां का जो आपसी भाईचारा और रहन सहन है, उसमें हर किसी के लिए जगह है। जम्मू कश्मीर के लोग मिलकर रहते हैं और यह धरती दुनिया के हर कोने से लोगों का स्वागत करती रही है और आगे भी करती रहेगी।
जो तत्व ऐसी हरकतों पर उतर आए हैं, उन्हें यहां की अमन की फ़िजा हजम नहीं होती। डीजीपी ने कहा कि लोग इनको मुंहतोड़ जवाब देंगे।ड्रग्स से संबंधित एक सवाल को लेकर डीजीपी ने कहा कि यह परेशानी की बात तो जरूर है लेकिन जिस सख्ती से ड्रग्स के कारोबार के खिलाफ काम किया जा रहा है वो समाज की बेहतरी के लिए जरूरी है।
पुलिस के साथ साथ लोगों को भी इसके खिलाफ लड़ी जा रही लड़ाई में शामिल होना है और इसे आगे बढ़ाना है। हमने उसी तरह इस चुनौती का भी सामना करना है जैसे दहशतगर्दी का किया है।
इस बीच कुपवाड़ा में नशा तस्करी में पुलिस वालों की गिरफ्तारी को लेकर डीजीपी ने कहा कि इस तरह के अपराध में जो भी शामिल होगा, वो किसी भी महकमे से हो उसके खिलाफ भी वही तरीका अपनाया जाएगा जो बाकियों के लिए है। उनके साथ और भी सख्ती बरती जाएगी।