कभी उग्रवाद और अशांति का गढ़ बन गई थी घाटी
सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा कर बढ़ाया मनोबल
कुपवाड़ा। जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) नलिन प्रभात ने शनिवार को उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में लोलाब घाटी का दौरा किया। यह पहली बार है जब कोई पुलिस प्रमुख इस दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्र में पहुंचे, जो कभी उग्रवाद और अशांति का गढ़ माना जाता था। नियंत्रण रेखा (एलओसी) के करीब बसे इस क्षेत्र ने लंबे समय तक सुरक्षा चुनौतियों का सामना किया है। डीजीपी का यह दौरा कानून-व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा, सुरक्षा व्यवस्थाओं का आकलन और स्थानीय पुलिस बलों का मनोबल बढ़ाने के उद्देश्य से था। उनके साथ वरिष्ठ अधिकारी, जिसमें एसएसपी कुपवाड़ा गुलाम जीलानी वानी भी शामिल थे।
इस यात्रा का मकसद स्पष्ट संदेश देना था कि उग्रवाद और हिंसा के लिए कोई जगह नहीं होगी और प्रशासन केंद्र शासित प्रदेश के हर हिस्से में स्थायी शांति सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। स्थानीय लोगों ने इस दौरे का स्वागत किया और इसे सकारात्मक व ऐतिहासिक कदम बताया। कई निवासियों ने कहा कि पहली बार उन्हें लगा कि शीर्ष अधिकारियों ने उनकी सुनी और देखी। लोगों ने इस बात की सराहना की कि डीजीपी ने दूर से रिपोर्ट या निर्देश भेजने के बजाय व्यक्तिगत रूप से क्षेत्र का दौरा किया। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा न केवल कानून-व्यवस्था के लिए बल्कि स्थानीय लोगों के साथ विश्वास बनाने के लिए भी महत्वपूर्ण है। उनका कहना है कि इस तरह का सीधा संपर्क विशेष रूप से उन क्षेत्रों में सुरक्षा और समावेश की भावना पैदा करता है, जो वर्षों से संघर्ष से प्रभावित रहे हैं। संवाद