रेलवे ट्रैक की मरम्मत आधुनिक मशीन का उपयोग किया जा रहा रेलवे फोटा रेलवे
कश्मीर में पहली बार ट्रैक पर टैंपिंग व गिट्टी की सफाई के लिए मशीन लाई गई
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू-कश्मीर में रेलवे अपने बुनियादी ढांचे और ट्रेन परिचालन को ज्यादा सुरक्षित और सुविधाजनक बना रहा है। ट्रैक और डिब्बों की मरम्मत अब हाथों से नहीं, नई मशीनों और तकनीक से की जा रही है। इससे ट्रैक पर काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा व कामकाज सुधरेगा। टैंपिंग मशीन का उपयोग रेलवे पटरियों के नीचे के गिट्टी को पैक करने के लिए किया जाता है।
कश्मीर में पहली बार ट्रैक पर टैंपिंग और गिट्टी की सफाई के लिए मशीन लाई गई है। जून में एक मशीन तैनात की गई है। अब तक घाटी में लगभग 88 किलोमीटर ट्रैक को मजबूत किया गया है। कश्मीर के लिए नई ट्रेनों के शुरू होने से रेल पटरियों का रखरखाव जरूरी हो गया है। पहले यह रखरखाव मानवीय तरीके से होता था। एआई तकनीक से पटरियों की खराबी का पता लगाया जा रहा है। इस मार्ग पर दो गिट्टी सफाई मशीनें (बीसीएम) भी तैनात की गई हैं। जुलाई में घाटी में दो अतिरिक्त बीसीएम भेजी गईं हैं। टैंपिंग और डीप स्क्रीनिंग कार्य को पूरा करने के लिए कठुआ, काजीगुंड, माधोपुर और जींद स्थित गिट्टी डिपो से कश्मीर रेल मार्ग पर 17 गिट्टी रैक भेजे गए। 19 हजार घन मीटर गिट्टी भरी गई। ट्रैक रिकॉर्डिंग कार (टीआरसी) और ऑसिलेशन मॉनिटरिंग सिस्टम से रेलवे पटरी की गुणवत्ता का आकलन किया गया है।
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लखनऊ वर्कशाॅप में डिब्बे भेजने में आसानी
जम्मू-कश्मीर में यात्री डिब्बों के रखरखाव और उन्नयन में बदलाव आया है। जम्मू-श्रीनगर रेल लिंक के शुरू होने से अब कश्मीर घाटी में डीईएमयू, एमईएमयू डिब्बों को लखनऊ भेजने में आसानी हो रही है। पहले सड़क मार्ग से बडगाम से लखनऊ तक डिब्बों को ले जाना पड़ता था। अब डिब्बों को रेल मार्ग से भेजा जा रहा है। कश्मीर में डिब्बों के उन्नयन का कार्य इस साल 31 अगस्त तक पूरा कर लिया जाएगा।
रेलवे ट्रैक की मरम्मत आधुनिक मशीन का उपयोग किया जा रहा रेलवे फोटा रेलवे