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Jammu News: मानसून के खतरे का अलार्म, हटेंगी तटवर्ती बस्तियां

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- गर्मियों में जलस्तर कम होने के बाद किनारे पर आ बसे लोगों को सुरक्षित करेगा प्रशासन
-बड़ी नदियों से ज्यादा बरसाती नालों से है खतरा
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। गर्मियों में नदी और नालों के घटते जलस्तर को देख तट पर आ बसे लोगों को अब हटना होगा। आपदा प्रबंधन पुनर्वास विभाग ने ऐसी बस्तियों की पहचान करने के निर्देश दे दिए हैं। प्रशासन पहचान के बाद तट को रिहायश बना चुके लोगों को संभावित खतरे वाली जगह से हटाकर दूसरी जगह बसाएगा। मानसून आने से पहले प्रदेश में यह इंतजाम पूरे कर लिए जाएंगे।
आगामी दिनों में प्रशासन चिनाब और तवी समेत दूसरी नदियों और उन छोटे नालों की पड़ताल करेगा जो गर्मियों में सूख चुके थे। मौसम विज्ञान विभाग ने इस बार जून माह के मध्य से मानसून के सक्रिय होने की संभावना जताई है और इसके बाद लगातार बारिश हो सकती है। इससे नदी और नालों के जलस्तर के बढ़ने की संभावना रहेगी। ऐसे में आपदा प्रबंधन और पुनर्वास विभाग समेत प्रशासन नदी और नालों के तट पर रह रहे लोगों की पहचान कर उन्हें आगामी 15 दिन में हटाने का अभियान भी चलाएगा।
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अभी तक जो मामले सामने आए हैं उनमें ज्यादातर झुग्गी-झोंपड़ी के ही हैं। आपदा प्रबंधन पुनर्वास के डिप्टी इंसीडेंट कमांडर राजेश कुमार ने बताया कि नदी किनारे कोई बड़ी बस्ती तैयार हुई हो, इसकी फिलहाल कोई शिकायत नहीं मिली है। बड़ी नदियों से ज्यादा खतरा बरसाती नालों से है। छोटे और बरसाती नाले किनारे लोगों ने अपनी रिहायश बनाई है तो इसे प्रशासन के साथ मिलकर चिह्नित किया जाएगा। मानसून आने से पहले सभी स्थल सुरक्षित किए जाएंगे। तट पर आ बसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी।
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