-100 फ्लैट में किराये पर रह पाएंगे रोजगार की तलाश में आए लोग
- किराये के लिए बनाए गए फ्लैट की बिक्री शुरू, जेडीए ने पूरी की 15 फ्लैट की प्रक्रिया
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। शहर में 760 गरीब परिवारों के पास जल्द अपना घर होगा। जम्मू-विकास प्राधिकरण (जेडीए) वन-वीएचके आवास योजना के तहत इन परिवारों के लिए घरों का निर्माण कर रहा है। किराये का घर ढूंढ रहे लोगों की मुश्किल भी शहर में खत्म होने वाली है। जेडीए ने शहर के बाहरी इलाकों में आवास तैयार कर उन्हें किराये पर देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
प्रधानमंत्री आवास योजना और जम्मू-कश्मीर सरकार की किफायती किराया आवास योजना के तहत जम्मू के भलवाल में 15 वन वीएचके फ्लैट किराये पर दिए हैं। इसके लिए 28 फरवरी तक आवेदन करने की अंतिम तारीख तय की गई थी। आर्थिक रूप से कमजोर, निम्न आय वर्ग और अस्थायी रूप से जम्मू शहर में नौकरी करने आए लोगों को इन फ्लैट में कमरे प्राथमिकता के आधार पर देने का फैसला लिया गया है। जेडीए भविष्य में इस योजना के तहत दूसरी जगहों पर भी ऐसे फ्लैट तैयार कर जरूरतमंद लोगों को उपलब्ध करवाएगा।
शहर में 10% बढ़े हैं जमीन के भाव
राजस्व विभाग की सिफारिश के बाद प्रदेश में पहली जनवरी से जमीन की कीमतों में 10 फीसदी उछाल देखने को मिला है। इस समय जम्मू शहर में जमीन का भाव 80 लाख से 2.50 करोड़ रुपये प्रति कनाल के बीच है। जिन इलाकों में निर्माण तेजी से हो रहा है वहां जमीन की कीमतें सबसे न्यूनतम स्तर पर हैं और इनके आगामी पांच से दस सालों में दोगुने से ज्यादा होने की संभावना है। जेडीए के लिए सबसे बड़ी मुश्किल अवैध कब्जों को लेकर भी है। जिन इलाकों को जेडीए ने जिन इलाकों का चयन किया है उनमें से ज्यादातर में अवैध कब्जों की भरमार है। जम्मू शहर के मुठ्ठी, भलवाल, नरवाल और सतवारी समेत दूसरे इलाकों में बड़ी-बड़ी इमारतें बन रहीं हैं। जेडीए ने जिन कामों को पूरा कर लिया है उन्हें किराये या लीज पर देने की प्रक्रिया भी पूरी की जा रही है। जेडीए प्रबंधन की ओर से इस बारे में अधिसूचना जारी कर दी गई है। जेडीए उपाध्यक्ष रुपेश कुमार की ओर से इस योजना की रिपोर्ट को वेबसाइट पर साझा किया गया है।
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महिला मुखिया होंगी फ्लैट की मालकिन
घर की महिला मुखिया के नाम पर फ्लैट का आवंटन होगा। जब परिवार की कोई महिला सदस्य व्यस्क न हो तो इसे पुरुष के नाम पर किया जा सकता है। न्यूनतम अवधि 20 साल के लिए तय की गई है। आवास योजना के तहत विकसित किए जा रहे भवनों के निर्माण में देरी होती है तो जेडीए इसके लिए अतिरिक्त समय ले सकता है।