कश्मीर में केवल पुलवामा को छोड़कर बाकी जिलों का ऋण-जमा अनुपात निगेटिव
जम्मू संभाग के छह जिलों ने इस मामले में सकारात्मक बढ़त बनाई
प्रवेश कुमारी
जम्मू। लोन बांटने के मामले में जम्मू के बैंकों ने कश्मीर को पीछे छोड़ दिया है। प्रदेश के लीड बैंकों के आंकड़ों में यह सामने आया है। कश्मीर में अगर पुलवामा जिले को छोड़ दिया जाए तो बाकी सभी जिलों में बैंकों का ऋण-जमा अनुपात नकारात्मक है। जम्मू के छह जिलों ने इस मामले में सकारात्मक बढ़त दर्ज की है।
बैंक न केवल ग्राहकों की नकदी जमा करने का काम करता है, बल्कि उद्योग लगाने, स्टार्टअप खड़ा करने, वाहन खरीदने, आवास बनाने, प्लॉट खरीदने, बच्चों की शिक्षा, शादी-ब्याह जैसी अपने ग्राहकों की तमाम जरूरतों के लिए लोन भी बांटता है। माना जाता है कि जो बैंक जितना लोन बांटता है, वह उतना अधिक आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने में भागीदार होता है। लोन के ब्याज से उसकी अपनी कमाई भी बढ़ती है, जिसे वह अपनी अन्य योजनाओं को पूरा करने में लगाता है।
ऋण-जमा अनुपात यह बताता है कि बैंक के कुल डिपॉजिट यानी जमा में से कितना लोन के रूप में उधार दिया गया है। अगर आदर्श तौर पर देखें तो बैंक का ऋण-जमा अनुपात 75 फीसदी होना बेहतर होता है, लेकिन जम्मू-कश्मीर के आंकड़े इस मामले में कुछ अलग तस्वीर दिखाते हैं।
कश्मीर में लीड बैंक जेके बैंक है, जबकि जम्मू के जिलों का स्टेट बैंक ऑफ इंडिया। इनके यूटीलेवल बैंकर्स कमेटी (यूटीएलबीसी) के आंकड़े साफ बताते हैं कि कश्मीर में लोन बांटने के मामले में बैंकों का हाथ बहुत तंग है।
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कम ऋण-जमा अनुपात का मतलब...
अगर किसी बैंक का ऋण-जमा अनुपात यानी सीडी अनुपात कम है तो वह घटे क्रेडिट फ्लो की तरफ इशारा करता है, जो आर्थिक गतिविधियां धीमी होने का परिचायक है। इससे बैंकों का लाभ घट सकता है। लोन से कम ब्याज की वजह से बैंकों की कमाई कम हो सकती है।
बढ़े ऋण-जमा अनुपात का नुकसान भी
आम तौर पर अधिक ऋण-जमा अनुपात को बैंकों के लिए बेहतर माना जाता है। लेकिन कई बार इसमें नुकसान भी शामिल होता है। जैसे बैंक के पास आपात स्थिति से निपटने के लिए नकदी कम हो सकती है या बैंकों का एनपीए बढ़ सकता है आदि।
सकारात्मक बढ़त दिखाने वाले जिले...
नाम 2024 में सीडी अनपात प्रतिशत में 2025
डोडा 77.18 78.06
सांबा 59.25 60.27
किश्तवाड़ 55.44 60.08
उधमपुर 52.31 53.99
रियासी 50.38 53.81
कठुआ 53.23 54.13
जम्मू संभाग के जिलों में सीडी रेशो बेहतर होने का कारण यह है कि यहां लोग लोन लेने में रुचि दिखा रहे हैं। कश्मीर में लोग लोन लेने में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखा रहे।
-सुधीर गुप्ता, एजीएम, जेएंडके बैंक