कश्मीर में आतंकियों की संपत्तियों पर होने वाली कार्रवाई से आतंकवाद की कमर तोड़ने का काम शुरू कर दिया गया है। सेना और पुलिस के सेवानिवृत्त लोगों ने कहा कि यह कार्रवाई 30 साल पहले ही हो जानी चाहिए थी। संपत्तियां जब्त करना समस्या का हल नहीं है।
सेवानिवृत्त मेजर जनरल गोवर्धन सिंह जमवाल का कहना है कि आतंकियों पर यह कार्रवाई बहुत पहले होनी चाहिए थी। पूर्व की सरकारों ने इन्हें बचाने का हर संभव प्रयास किया है। उन्होंने यह भी कहा है कि इन आतंकियों का समर्थन करने वालों की संपत्तियां भी सरकार को अपने कब्जे में लेनी चाहिए थीं।
आतंकवाद का समर्थन करने वालों को किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करना चाहिए। आगे ही जम्मू कश्मीर में कार्रवाई होने में बहुत साल लग गए हैं।
आतंकी मुश्ताक अहमद जरगर उर्फ लटरम को 1990 में कंधार कांड में छोड़ा गया था। 30 साल बाद इसकी संपत्ति जब्त की गई है। भारत को इसकी संपत्ति अटैच करते हुए 30 साल लग गए जो कि उसी समय होना चाहिए था। यदि कोई आतंकी इस तरह करता है तो उस पर उसी समय कार्रवाई होना चाहिए। - एसपी वैद, पूर्व डीजीपी