गृह मंत्रालय और लद्दाख प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शनकारियों ने लद्दाख को पूर्ण राज्य और जल्द भर्ती शुरू करने की मांग उठाई। भाजपा को छोड़ लद्दाख में तमाम सियासी दलों, धार्मिक व सामाजिक संगठनों ने लद्दाख की इन चारों मांगों के समर्थन में बंद रखा।
केंद्र शासित प्रदेश बने लद्दाख के स्थापना दिवस के दो दिन बाद बुधवार को लद्दाखी सड़कों पर उतर आए। लद्दाख में आहूत बंद के दौरान दुकानें, व्यावसायिक प्रतिष्ठान नहीं खुले। कारगिल में कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस (केएडी) और लेह में लेह एपेक्स बॉडी (लैब) के बैनर तले हजारों की तादाद में लद्दाखी सड़क पर उतर आए।
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गृह मंत्रालय और लद्दाख प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शनकारियों ने लद्दाख को पूर्ण राज्य, लद्दाख को सांविधानिक सुरक्षा के लिए छठवीं अनुसूची में शामिल करने, राज्य सभा और लोकसभा के लिए अतिरिक्त सीट व जल्द भर्ती शुरू करने की मांग उठाई।
भाजपा को छोड़ लद्दाख में तमाम सियासी दलों, धार्मिक व सामाजिक संगठनों ने लद्दाख की इन चारों मांगों के समर्थन में बंद रखा। केडीए नेता असगर अली करबलाई और लैब नेता थुपसन छेवांग समेत अन्य प्रतिनिधियों ने केंद्र की नीति को ढुलमुल करार दिया।
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लद्दाख को केंद्र शासित बनाए जाने के फैसले पर लेह और कारगिल में वैचारिक मतभेद रहा था। कारगिल ने अनुच्छेद 370 को बहाल रखने की मांग की थी, जबकि लेह में इसके हटने पर जश्न मनाया गया था। बदले हालात में लद्दाख की पहचान पर संकट को देखते हुए दोनों जिलों के संगठनों ने एक मंच पर आकर लद्दाख को पूर्ण राज्य समेत अन्य मांगों को लेकर संघर्ष का एलान किया।
गतिरोध के बीच एलजी को भर्ती के अधिकार
लद्दाख में एलजी प्रशासन और विभिन्न संगठनों के बीच गतिरोध के बीच केंद्रीय मंत्रालय ने उप राज्यपाल को सार्वजनिक सेवाओं में भर्ती के अधिकार दे दिए हैं। नई दिल्ली से जारी एसओ के अनुसार संविधान के अनुच्छेद 309 के तहत राष्ट्रपति की ओर से लद्दाख के उप राज्यपाल को भर्ती के अधिकार दिए जाते हैं।
इसमें सेवाओं और पदों के लिए योग्यता निर्धारण के अधिकार होंगे। भर्ती की शर्तों के अलावा प्रोबेशन अवधि, वरिष्ठता और पदोन्नति नियम भी बनाए जा सकते हैं। हालांकि इन निर्देशों के तहत जो भी नियम बनाए जाएंगे, वे पूर्व में संघ लोक सेवा आयोग से किए गए परामर्श पर आधारित ही होंगे। ब्यूरो