जम्मू कश्मीर के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों सहित प्रदेश के कई नेताओं ने उन रिपोर्टों की जांच की मांग की है, जिनमें पुलवामा में सुरक्षाबलों पर एक मस्जिद में नमाजियों को धार्मिक नारे लगाने के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया है। हालांकि अभी तक सेना-पुलिस ने इस मामले में चुप्पी साधे हुए है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट कर कहा कि पुलवामा के जडूरा से मिली सूचनाएं बेहद परेशान करने वाली हैं। उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह इन रिपोर्टों की पारदर्शी तरीके से जांच के निर्देश देंगे।
पीडीपी अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने एक ट्वीट के माध्यम से कहा इन बातों को सुन कर स्तब्ध हूं। अमरनाथ यात्रा से पहले यह कदम उकसावे वाले हैं। डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी के अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद ने भी कथित घटना की निंदा करते हुए सरकार से जांच का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि फिलहाल ये आरोप हैं, लेकिन इसकी जांच होनी चाहिए। आजाद ने कहा कि ऐसी चीजें न तो हमारी संस्कृति में हैं और न ही कानून के तहत इसकी अनुमति है। जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मंत्री अल्ताफ बुखारी ने कहा कि वह इस घटना के बारे में जानकर दुखी हैं।केंद्र सरकार प्राथमिकता पर घटना की जांच का आदेश दे।
पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और पूर्व मंत्री सज्जाद लोन ने कहा कि घटना बेहद निंदनीय है। लोन ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा कि उम्मीद के विपरीत कि प्रशासन यह सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव कदम उठाएगा कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। वरिष्ठ सीपीआई (एम) नेता एमवाई तारेगामी ने मांग की है कि मामले की पारदर्शी और त्वरित तरीके से जांच की जाए।