जम्मू। सिख समुदाय के लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उपराज्याल के सलाहाकर के रूप में किसी सिख व्यक्ति को नियुक्त करने की मांग उठाई है। रविवार को विभिन्न सिख संगठनों ने संयुक्त बैठक भाई कन्या निष्काम सेवा सोसाइटी के मुख्य आयोजक सरदार मोहिंद्र सिंह की अध्यक्षता में हुई। इसमें समुदाय से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई। इसके साथ ही सरकार पर समुदाय के लोगों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया है।
सरदार मोहिंद्र सिंह ने कहा कि प्रदेश में सिख समुदाय मौजूदा अलग-थलग महसूस कर रहा है। उपराज्यपाल के शासन में सिख समुदाय की अनदेखी हो रही है। प्रतिनिधित्व को कम किया जा रहा है। सर्विस सिलेक्शन बोर्ड और पब्लिक सर्विस कमीशन में सिख समुदय के प्रतिनिधित्व होना चाहिए। जम्मू कश्मीर के सिख संगठन भी अन्य आरक्षित श्रेणियों की तरह समुदाय के शिक्षित बेरोजगार युवाओं के लिए नौकरी में आरक्षण की मांग करता है। प्रदेश में सिखों के साथ भेदभाव का बड़ा सुबूत पंजाबी भाषा को प्रदेश की अधिकारिक भाषा में शामिल नहीं करना है। सरकार से मांग है कि उपराज्यपाल के सलाहकार के रूप में सिख समुदाय के व्यक्ति को नियुक्त करने के साथ ही हाईकोर्ट में सिख जज की नियुक्ति हो। सदस्यों ने कहा कि प्रधानमंत्री ने 2014 में 1947 के सभी पीओके शरणार्थियों को 30 लाख देने का वादा किया था, लेकिन अभी तक 24.50 लाख राशि बकाया है। बैठक में शिरोमणि अकाली दल जम्मू-कश्मीर के अध्यक्ष एस. दरबिंदर सिंह, महासचिव एस. राजिंदर सिंह, सरपंच सदस्य डीजीपीसी जम्मू एस. राजा सिंह आदि मौजूद रहे।