जम्मू। डीपीसी (डिपार्टमेंटल प्रमोशन कमेटी) में देरी पर चिकित्सा कर्मचारी 20 नवंबर से दोबारा आंदोलन शुरू करेंगे। इस दिन स्वास्थ्य निदेशालय पर धरना देकर शक्ति प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद 23 नवंबर से क्रमिक भूख हड़ताल शुरू की तैयारी है। कर्मियों ने जल्द डीपीसी नहीं होने की सूरत में आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है।
जम्मू-कश्मीर मेडिकल इंप्लाइज फेडरेशन जम्मू के प्रधान सुशील सूदन ने बताया कि चार साल से विभिन्न वर्ग में डीपीसी नहीं की गई है, जबकि आधिकारिक तौर पर इसे हर छह माह के अंतराल में किया जाना चाहिए। डीपीसी न होने के कारण बड़ी संख्या में कर्मचारी सेवानिवृत्त हो गए हैं, जिन्हें पदोन्नति का लाभ नहीं मिल पाया है। गत अगस्त में कर्मियों के संघर्ष के बाद एसआरओ-20 में संशोधन किया गया था, जिसके बाद कानून तय करके डीपीसी की जानी थी। लेकिन ढाई माह बीत जाने के बाद भी डीपीसी में देरी की जा रही है, जिससे चिकित्सा कर्मियों को आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ा है। स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा विभाग के पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव अटल डुल्लू के आश्वासन पर कर्मियों ने आंदोलन स्थगित किया था, जिसमें अगले 15 दिन में डीपीसी नियम बनाने का वादा किया गया था। लेकिन प्रशासनिक विभाग की ओर से लेटलतीफी की जा रही है। इस कारण कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
विभाग में खाली पद भी नहीं भरे जा रहे हैं। उन्होंने विभागीय अधिकारियों से जल्द डीपीसी जारी करने की मांग की। कोविड के दौरान उपराज्यपाल की ओर से गत मई में एक आदेश के तहत डाक्टरों को 10 हजार, पैरा मेडिकल कर्मियों को सात हजार और चालक व चतुर्थ श्रेणी कर्मियों को पांच हजार का नकद प्रोत्साहन देने की घोषणा की थी। लेकिन आज तक एक एकमात्र कर्मचारी को भी यह प्रोत्साहन नहीं दिया गया है। इस कोविड जैसी विकट परिस्थितियों में काम करने वाले कर्मियों के मनोबल पर असर पड़ता है।