नरेंद्र मोदी-अमित शाह (फाइल फोटो)
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बहुप्रतीक्षित राज्य विधानसभा के परिसीमन की घोषणा अमरनाथ यात्रा से पहले करना मोदी-शाह जोड़ी के लिए काफी चुनौतीपूर्ण होगी। केंद्र के इस कदम से कश्मीर में हालात खराब हो सकते हैं। पीडीपी और नेकां समेत घाटी आधारित अन्य दल पहले ही परिसीमन पर विरोध जता चुके हैं।
यदि केंद्र सरकार ने परिसीमन की घोषणा की तो घाटी में विरोध प्रदर्शन का सिलसिला शुरू हो सकता है। पीडीपी और नेकां के साथ ही पीपुल्स कांफ्रेंस तथा शाह फैसल की जम्मू-कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट सड़क पर उतरकर केंद्र सरकार के फैसले का विरोध कर सकती है।
साथ ही इस मसले को सांप्रदायिक रंग देने के लिए अलगाववादी तथा पत्थरबाज सक्रिय हो सकते हैं। जानकारों का कहना है कि पहली जुलाई से शुरू हो रही अमरनाथ यात्रा से पहले केंद्र सरकार इस तरह का कोई जोखिम नहीं उठाएगी जिससे घाटी में हिंसा भड़के।
साथ ही इससे अमरनाथ यात्रियों की सुरक्षा पर किसी प्रकार की आंच आए। हालांकि, सोशल मीडिया में यह वायरल हो रहा है कि परिसीमन के संबंध में गृह मंत्री ने कोई बैठक नहीं ली है। लेकिन परिसीमन के मुद्दे पर राज्य में सियासत गरमा गई है।
जम्मू आधारित दलों ने परिसीमन का काम जल्द से जल्द पूरा करने की मांग की है ताकि जम्मू को उसका हक मिल सके। यहां के नेताओं को विश्वास है कि जम्मू के हक में विधानसभा की कई सीटें आएंगी। भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियों ने विधानसभा चुनाव से पूर्व परिसीमन करवाने की मांग की है।