जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक दल महिलाओं को चुनावी टिकट देने में कंजूसी बरतते रहे हैं। जिसके चलते 1962 से 2014 तक केवल दस महिलाएं ही विधायक बन पाईं। 1972 के विधानसभा चुनाव में सबसे अधिक चार महिलाएं जीतकर विधायक बनी थीं। लेकिन इसके बाद की दशकों में स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है।
1962 से 2014 तक हुए विधानसभा चुनावों में जम्मू-कश्मीर में सिर्फ 172 महिलाओं को चुनावी मैदान में उतारा गया। जिनमें से अधिकांश निर्दलीय थीं। इनमें से 142 महिला उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई। जो महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व की स्थिति को दर्शाता है। 2008 में सबसे अधिक 67 महिला उम्मीदवार चुनावी मैदान में थीं। लेकिन इनमें से 56 की जमानत जब्त हो गई और केवल एक महिला ही जीत पाई।
महबूबा मुफ्ती जम्मू-कश्मीर की पहली महिला हैं। जो दो बार विधायक रही हैं। 1996 में कांग्रेस के टिकट पर बिजबिहड़ा से जीतकर विधायक बनीं, और 2002 में पीडीपी की टिकट पर पहलगाम से चुनाव जीता। अन्य महिला विधायक भी कांग्रेस और नेकां की टिकट पर चुनाव जीत चुकी हैं, लेकिन महिलाओं की चुनावी भागीदारी में निरंतर कमी बनी रही है।
1972 में चार महिलाएं विधानसभा में पहुंची थीं। जो अभी तक की सबसे बड़ी संख्या है। उन सभी ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था और अमीरकदल से जबिना बेगम, बनिहाल से हाजरा बेगम, टिकरी से निर्मला देवी, और जिंद्रा घरोटा से शांता भारती ने जीत दर्ज की थी।