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महबूबा की अमित शाह से अंतिम दौर की वार्ता आज

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जम्मू कश्मीर में नई सरकार के लिए भाजपा और पीडीपी के बीच गठबंधन का विधिवत ऐलान दो दिन के अंदर होगा। पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती की भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात मंगलवार को प्रस्तावित है।
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पहले यह वार्ता सोमवार को होने वाली थी, लेकिन, बाद में इसे एक दिन आगे बढ़ा दिया गया। महबूबा और शाह के बीच अंतिम दौर की वार्ता में न्यूनतम साझा कार्यक्रम (सीएमपी) के कुछ मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होगी।

विवादास्पद मुद्दों पर सहमति बन चुकी है, लेकिन, पीडीपी विवादास्पद मुद्दों पर और सफाई चाहती है। सीएमपी के दस्तावेज को सार्वजनिक करने से पहले पीडीपी कश्मीरियों के हितों की गारंटी चाहती है।
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नई सरकार के शपथ ग्रहण के लिए पहले 27 फरवरी की तिथि तय हुई थी, लेकिन, अब यह एक मार्च तक संभव हो सकेगा। पीडीपी ने हुर्रियत को भी आश्वस्त किया है कि जम्मू कश्मीर के विशेष दर्जा के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं होगी।

भ्रम के बादल छंट गए हैं

पीडीपी के मुख्य प्रवक्ता नईम अख्तर ने अमर उजाला को बताया कि भ्रम के बादल छंट गए हैं। अब कुछ मुद्दों को और स्पष्ट किया जाना है। यह दो दिन में पूरा कर लिया जाएगा। उसके बाद सरकार के गठन के लिए विधिवत ऐलान कर दिया जाएगा।

दोनों दलों में तालमेल पहले ही हो चुका है। सरकार का गठन पूरे छह साल के लिए होगा इसलिए मुद्दों पर आधारित गठबंधन जरूरी है। यही कारण है कि सीएमपी पर दो महीने तक लंबी बातचीत के बाद सहमति बनी है।

विधानसभा चुनाव के नतीजे 23 दिसंबर को आने के बाद से ही स्थायी सरकार के लिए भाजपा और पीडीपी ने साथ आने की जरूरत महसूस की थी। हालांकि पहले भाजपा ने नेशनल कांफ्रेंस के साथ भी एक दौर की बातचीत की थी लेकिन वह सफल नहीं हो सकी।
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मुफ्ती हर्रियत से केंद्र की वार्ता के पक्ष में

पीडीपी को कश्मीर में 28 और भाजपा को जम्मू संभाग में 25 सीटें मिलीं हैं। इस तरह जम्मू और कश्मीर के खित्तों से अलग-अलग जनादेश पीडीपी और भाजपा के पक्ष में आया। जनादेश के सुर ने भाजपा और पीडीपी को समझौते के लिए प्रेरित किया।

87 सीटों वाली विधानसभा में कोई दूसरा गठबंधन स्थायी सरकार देने में सक्षम नहीं दिख रहा था। पीडीपी और भाजपा के सूत्रों के मुताबिक महबूबा और अमित शाह की मुलाकात में सीएमपी के तमाम मुद्दों को स्वीकृति दे दी जाएगी।

बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ पीडीपी संरक्षक मुफ्ती मोहम्मद की मुलाकात में पाकिस्तान के साथ वार्ता जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।

मुफ्ती हर्रियत से केंद्र की वार्ता के पक्ष में हैं और ये दोनों मुद्दे पीडीपी की शर्तों में शामिल रहे हैं। हालांकि, मोदी ने विदेश सचिव स्तर की बातचीत के लिए पहले ही हरी झंडी दे दी है। इसलिए मोदी-मुफ्ती मुलाकात में सिर्फ गठबंधन पर अंतिम मुहर लगाने की औपचारिकता ही होगी।
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