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‘सर्जिकल स्ट्राइक डे’ मनाने को लेकर गरमाया जम्मू विवि कैंपस, आयोजन से इंकार

Thu, 27 Sep 2018 06:45 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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जम्मू विश्वविद्यालय कैंपस 29 सितंबर को सर्जिकल स्ट्राइक डे के आयोजन के मुद्दे पर गरमा गया है। छात्रों ने डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर (डीएसडब्ल्यू) से इस दिन को मनाने के लिए लिखित में आवेदन भेजा, जिसे उन्होंने विश्वविद्यालय में चल रहे डिस्प्ले योर टैलेंट कार्यक्रम का हवाला देकर इस दिन का आयोजन कराने से इंकार कर दिया। छात्रों ने जहां विश्वविद्यालय पर अलगाववादियों के दबाव पर काम करने का आरोप जड़ा, वहीं डीएसडब्ल्यू परमेश्वरी ने तर्क दिया कि इस आयोजन के लिए करीब 10 दिन तैयारी की जरूरत है। कार्यक्रम को बाद में कोई तिथि निर्धारित कर बेहतर तरीके से कराया जाएगा।
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यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (यूजीसी) ने बीती 19 सितंबर को सभी विश्वविद्यालयों को पत्र भेज 29 सितंबर को सर्जिकल स्ट्राइक डे के रूप में मनाने को कहा था। पत्र में एनसीसी यूनिटों की स्पेशल परेड, पूर्व सैनिकों को बुलाकर छात्रों को सशस्त्र सेनाओं के सीमा पर बलिदान के बारे में जागरूक किए जाने जैसी गतिविधियां करने को कहा गया था। विश्वविद्यालयों से यह भी कहा गया था कि वह इन गतिविधियों को यूजीसी वेबसाइट के यूनिवर्सिटी एक्टिविटी मॉनिटरिंग पोर्टल पर भी अपलोड करें।

जम्मू विश्वविद्यालय के छात्रों का आरोप है कि उन्होंने जब डीएसडब्ल्यू को 29 सितंबर को सर्जिकल स्ट्राइक डे मनाने को लेकर लिखित आवेदन किया तो उन्होंने इससे इंकार कर दिया। आरोप है कि उन्होंने छात्रों से सर्जिकल स्ट्राइक की विश्वसनीयता साबित करने और प्रूफ लाने को कहा। इससे भड़के छात्रों ने विश्वविद्यालय में चल रहे डिस्प्ले योर टैलेंट प्रतियोगिता को रुकवा दिया और प्रदर्शन करने लगे।
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‘कार्यक्रम से इनकार सैनिकों का अपमान’

लॉ डिपार्टमेंट के छात्र साकेत सिंह राठौर, मनमोहन सिंह ने सर्जिकल स्ट्राइक डे मनाने से इंकार को सैनिकों का अपमान करार दिया। कहा कि अगर यह दिन नहीं मनाया जाता तो वह यूनिवर्सिटी को कैंपस में कोई प्रोग्राम नहीं करने देंगे। उनका आरोप था कि विश्वविद्यालय प्रशासन का व्यवहार ऐसा है, मानों वह कश्मीरी अलगाववादियों के इशारे पर काम कर रहा है। विश्वविद्यालय के ह्यूमन राइट्स के छात्र विकास भदौरिया ने कहा कि जम्मू-कश्मीर से ही सर्जिकल स्ट्राइक लॉन्च किया गया था, ऐसे में जम्मू विश्वविद्यालय के इसे मनाने से इंकार पर सवाल खड़ा होता है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने इससे पहले भी कश्मीरी अलगाववादियों के दबाव में रियासत में अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्याओं पर होने वाले सेमिनार को अनुमति नहीं दी थी।
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