मुख्य सचिव ने स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की तरफ से पेश किए गए डाटा आधारित वैज्ञानिक आकलन की सराहना करते हुए कहा कि जिला प्रशासन को कोविड शमन के लिए स्थानीय स्तर पर रणनीति बनाकर काम करना चाहिए।
मुख्य सचिव अरुण कुमार मेहता ने उपायुक्तों को प्रदेश में कोरोना शमन के लिए वैज्ञानिक और साक्ष्य आधारित प्रबंधन दृष्टिकोण अपनाकर 15 जून तक पॉजिटिविटी रेट को कम कर दो फीसदी लाने पर बल दिया है। श्रीनगर में शुक्रवार को उच्च स्तरीय बैठक में जिला आधारित कोविड नियंत्रण उपायों की समीक्षा करते हुए मेहता ने यह बात कही।
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उन्होंने जिला प्रशासन से कहा कि वह केवल जिला स्तर पर कोविड नियंत्रण उपायों को करने पर ध्यान केंद्रित न करें, उप जिला स्तर पर भी स्थिति पर करीबी नजर रखी जाएं और ठोस कदम उठाए जाए।
उन्होंने पंचायत स्तर के कोविड केयर सेंटरों का प्रयोग ग्रामीण स्तर के मरीजों को समय पर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया करवाने के लिए करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि इन सेंटरों पर प्रतिदिन कम से कम दस सैंपल एकत्रित किए जाएं। उन्होंने कहा कि जिन जिलों में ज्यादा मृत्यु दर है, वहां इसके कारणेें का पता करें और मरीजों को समय पर अस्पतालों में भर्ती करवाया जाए। दोनों संभागों के मंडलायुक्तों ने संभाग स्तर पर कोविड शमन के लिए उठाए जा रहे कदमों व उपायों की जानकारी दी। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के वित्त आयुक्त अटल डुल्लू ने प्रदेश में कोविड परिदृश्य की जानकारी दी।