जम्मू। वुशू में सिर्फ प्रदेश के लड़के ही नहीं, बल्कि बेटियां भी बढ़कर हिस्सा ले रहीं हैं और सफलता के परचम भी लहरा रहीं हैं। इसी का नतीजा है कि भगवती नगर के इनडोर स्टेडियम में प्रदेश की 450 से ज्यादा महिला खिलाड़ियों ने भाग लिया है। सिर्फ बड़े शहर ही नहीं, बल्कि दूर-दराज के जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों की लड़कियां भी बढ़-चढ़कर वुशू खेल रहीं हैं।
जम्मू की गिनाक्षी मेहरा ने बताया कि वह अभी दस साल की हैं और पिछले करीब तीन सालों से लगातार वुशू खेल रहीं हैं। वुशू एक फाइटिंग गेम है और लड़कियों की आत्मरक्षा के लिए लाभकारी है, इसलिए उन्होंने वुशू चुना। गिनाक्षी पिछले साल वुशू की सब जूनियर चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक भी जीत चुकी हैं आगे चलकर अंतराष्ट्रीय स्तर पर टीम इंडिया के लिए खेलना चाहतीं हैं।
एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतना है सपना: राजोरी से आईं परिणीति दंडयाल ने बताया कि वुशू के लिए पूरा समर्पण और शक्ति चाहिए, इसलिए उन्होंने बाकी खेलों की जगह वुशू खेलना ही चुना। परिणीति की उम्र अभी 13 साल है और वह पिछले छह साल से वुशू खेल रहीं हैं। इससे पहले वह 2023 में नेशनल गेम्स में भी खेल चुकी हैं। परिणीति का कहना है वे घरवालों के विश्वास पर खरा उतरना चाहतीं हैं। उनका सपना है कि वो एशियाई खेलों में देश का प्रतिनिधित्व करें और देश के लिए मेडल जीतें।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए खेलना लक्ष्य: शोपियां की रहने वाली सना शिराज का कहना है कि उनके आसपास के लोग बहुत ही रुढ़ीवादी सोच के थे। फिर भी उनके परिवार ने उन्हें कभी खेलने से नहीं रोका। पिछले तीन सालों से वह स्कूल में वुशू खेल रहीं हैं। बीच-बीच में प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए दूसरे जिलों में भी जाती रहतीं हैं। इसलिए लिए भी उनके परिवार ने उन्हें कभी नहीं रोका। सना का कहना है कि राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए खेलना और मेडल जीतना चाहतीं हैं, इससे उनके परिवार के अलावा उनसे इलाके का भी नाम रोशन हो।
कम संसाधनों के बावजूद खेलना नहीं छोड़ा: उधमपुर की रहने वाली लता देवी आठवीं कक्षा में पढ़तीं हैं। लता देवी ने बताया कि उन्होंने दो साल पहले वुशु खेलना शुरू किया था और पिछले एक साल से लगातार अभ्यास कर रहीं हैं। लता वुशू के अलावा जूडो और कबड्डी भी खेलती हैं।