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सशक्तीकरण की मिसाल: जम्मू-कश्मीर की बेटियां बना रही नया इतिहास; जानें.....संघर्ष और सफलता की कहानियां

Fri, 24 Jan 2025 12:21 PM IST
निकिता गुप्ता गौरव रावत अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

राष्ट्रीय बालिका दिवस पर जम्मू-कश्मीर की बेटियों ने साहस, सफलता और जुनून से अपने सपनों को साकार करने की प्रेरणादायक कहानियां साझा कीं, जो समाज में बदलाव की ओर बढ़ रही हैं।

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महक चिब, नैबिला खान, श्रुति दुबे और श्रृष्टि दुबे - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हैं पंछियों के जैसे मेरे पंख नहीं तो क्या, है बुलंद इरादा मेरे भीतर जो छिपा बैठा, है मुझमें हिम्मत, है हौसला मुझमें, अपने सपनों को पंख लगाकर मैं भी हूं उड़ सकती...ये पक्तियां जम्मू-कश्मीर की उन बेटियों को समर्पित हैं, जो छोटी सी उम्र में अपने बुलंद इरादों की बदौलत सफलता के आसमान में उड़ान भरना शुरू कर चुकी हैं। कोई खेल के मैदान में तो कोई रंगमंच पर कठिन मेहनत से खुद को तराश रही हैं।

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किसी ने अपनी परिकल्पनाओं को शब्दों में आकार देकर किताबों में उतारा है। खास बात यह कि खेल-लेखन-रंगकर्म में अपना शत प्रतिशत दे रहीं इन बेटियों को बाल विवाह की सामाजिक दुश्वारियों की भी चिंता है तो लड़का-लड़की में होने वाले भेदभाव को लेकर भी ये सजग हैं। यही वजह है कि ये बड़ी होकर सिविल सेवा, चिकित्सा क्षेत्र जैसे करिअर को अपनाना चाहती हैं। इन्हें लगता है कि शासन-प्रशासन का हिस्सा बनकर सामाजिक बदलाव लाने में इन्हें मदद मिलेगी। खैर, अभी इनके सपनों की उड़ान बाकी है। आइए जानते हैं प्रदेश की कुछ ऐसी ही बच्चियों के बारे में।

लिखना चाहती हूं बहुत कुछ, पर करिअर सिविल सेवा में बनाऊंगी
कक्षा सात में पढ़ती हूं। मुझे इतिहास विषय में रुचि है। मैंने दो किताबें लिखी हैं। एक का नाम है द सीक्रेट आफ अ डार्क रोज और ए बायोग्राफी आफ ए विलेज गर्ल। लिखना मुझे अच्छा लगता है, इसकी प्रेरणा स्कूल से मिली। मैं लिखना बहुत कुछ चाहती हूं, इतिहास विषय मुझे बहुत प्रिय है। करिअर मैं सिविल सर्विस में बनाऊंगी। मुझे लगता है कि जब हम शासन में होंगे तो समाज के लिए ज्यादा कुछ कर पाएंगे। वहीं मेरी मम्मी सहेली दुबे कहती हैं कि लिख कर हम लोगों के मानसिक स्तर को कहीं ज्यादा सशक्त बना सकते हैं।  श्रृष्टि दुबे

फुटबाल मेरा शौक, नीट की तैयारी करूंगी
मैं कक्षा 10 में पढ़ती हूं। बास्केटबाल खेल कर मैं खुद में नया आत्मविश्वास देखती हूं। मुझे बहुत अच्छा लगता है इसे खेलना। स्कूल स्तर पर कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेती हूं। राज्य स्तर पर खेल चुकी हूं। करिअर मैं नीट की तैयारी करके बनाऊंगी। मैं खेलना भी चाहती हूं, देश के लिए। डाक्टर बनकर मैं समाज की सेवा करना चाहती हूं, खासकर लड़कियों की सेहत के लिए काम करना चाहती हूं। मैं ये मानती हूं कि भेदभाव, बाल विवाह लड़कियों के लिए बड़ी चुनौती हैं, हम सब मिलकर प्रयास करेंगे तो इसका सामना कर सकेंगे। श्रुति दुबे

कराटे की खिलाड़ी हूं, सेना में अधिकारी बनना सपना 
मैं जम्मू के तालाब तिल्लो की रहने वाली हूं और अभी सातवीं कक्षा में पढ़ रही हूं। मेरे माता और पिता दोनों ही नौकरी करते हैं। बचपन से ही मैंने कराटे खेलना शुरू कर दिया था। अभी तक मैं गुजरात, दिल्ली और उत्तराखंड समेत कई राज्यों में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की कराटे प्रतियोगिताओं में भाग ले चुकी हूं। कई प्रतियोगिताओं में मुझे गोल्ड और सिल्वर मेडल भी जीत चुकी हूं। इसके अलावा मुझे डांस करने का भी शौक है। मुझे अपने माता-पिता के सपने पूरे करने हैं और देश की सेवा भी करनी है। इसलिए मैं बड़ी होकर सेना में जाना चाहती हूं। आद्रिका शर्मा

गकर्मी बनकर समाज के अनछुए मुद्दों को मंच देना है
मैं 9वीं कक्षा की छात्रा हूं और शहर के कच्छी छावनी इलाके में रहती हूं। मेरे पिता मुर्गीपालन का व्यवसाय करते हैं। मुझे शुरू से ही एक्टिंग का शौक था इसलिए काफी कम उम्र में ही मैंने नाटकों में हिस्सा लेना शुरू कर दिया। मैं नटरंग थियेटर से जुड़ी हूं और अब तक 25 से ज्यादा नाटकों में लीड रोल कर चुकीं हूं। मैं जूडो और जूजीत्सू की भी खिलाड़ी हूं। जूजीत्सू की नेशनल चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल भी जीत चुकी हूं। इसके अलावा मुझे डांस और मॉडलिंग का भी शौक है। क्लासिकल डांस में मेरी खास रुचि है। मैं आगे चलकर रंगकर्मी ही बनना चाहती हूं और ऐसे अनछुए मुद्दों को मंच देना चाहती हूं, जो समाज में बदलाव ला सकें।  महक चिब

अभिनय और पढ़ाई में हमेशा अव्वल आने की चाह 
मैं सातवीं कक्षा में पढ़ती हूं। अभी मेरी उम्र 13 साल है। बचपन से ही एक्टिंग का शौक था, इसलिए छह साल की उम्र से ही थियेटर जाना शुरू कर दिया था। अभी नटरंग थियेटर से जुडी हूं और 20 से ज्यादा नाटकों में लीड रोल कर चुकी हूं। कटरा में हर साल होने वाले नाटक ''माता रानी की कहानी'' और झिड़ी मेले में होने वाले बाबा जित्तो के जावन पर आधारित नाटक में भी लीड रोल कर चुकीं हूं।

पिछली साल मैंने सांस्कृतिक संसाधन एवं प्रशिक्षण केंद्र (सीसीआरटी) द्वारा हर साल युवा कलाकारों को दी जाने वाली स्कॉलरशिप भी प्राप्त की थी। मैं जम्मू-कश्मीर की पहली ऐसी कलाकार हूं, जिसे ये स्कॉलरशिप मिली है. मैं सिविल सर्वेंट बनना चाहती हूं। अभिनय और पढ़ाई में हमेशा अव्वल आने की चाह है। प्रियल अशोक गुप्ता
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कयाकिंग व केनोइंग में करूंगी देश का नाम
मैं 14 साल की हूं और कक्षा 10 में पढ़ती हूं। मैं तीन साल की थी जब इंडोनेशिया के जकार्ता में रहती थी। मां-पापा ने बताया कि मैं तब से तैराकी कर रही हूं। उसके बाद साइकिलिंग की। फिर हम लोग लौट आए कश्मीर। यहां आने के बाद वाटर स्पोर्ट्स से जुड़ी। कयाकिंग स्पोर्ट्स मुझे पसंद आने लगा। राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया है। इसी में आगे चलकर कॅरिअर बनाना है और देश का नाम रोशन करना है। नैबिला खान 
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