परिसीमन से जम्मू-कश्मीर में विधानसभा की सात सीटें बढ़ जाएंगी। इसके साथ ही यहां सीटों की संख्या 114 हो जाएगी जिसमें 24 सीटें पीओके के लिए आरक्षित रहेंगी। सात सीटें बढ़ने के साथ ही यहां का सियासी नक्शा बदल जाएगा। कई नई सीटों का सृजन होगा। इसके साथ ही आरक्षण में भी बदलाव होगा। अनारक्षित सीटें आरक्षित श्रेणी तथा आरक्षित सीटें अनारक्षित श्रेणी में जा सकती है।
डोमिसाइल व्यवस्था लागू होने के बाद प्रदेश की औद्योगिक इकाई वाले इलाके की सीटों पर बाहरी लोगों का प्रभाव बढ़ेगा क्योंकि कई लोगों के नाम मतदाता सूची में शामिल हो जाएंगे। इसके साथ ही पश्चिमी पाकिस्तान रिफ्यूजी भी कई सीटों पर प्रभाव डालेंगे खासकर बार्डर इलाके से जुड़ी सीटों पर।
नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) परिसीमन कार्यवाही से अपने को दूर रखने का कर चुकी है एलान
परिसीमन आयोग में सह सदस्य के रूप में जम्मू-कश्मीर से भाजपा सांसद व केंद्रीय राज्यमंत्री डा. जितेंद्र सिंह व जुगल किशोर शर्मा तथा नेकां सांसद डा. फारूक अब्दुल्ला, हसनैन मसूदी व मोहम्मद अकबर लोन को रखा गया है। नाम की घोषणा होने के साथ ही नेकां सांसदों ने इसका हिस्सा न बनने का एलान किया था।