प्रशासनिक सचिवों से कहा गया है कि वह जम्मू व श्रीनगर दोनों स्थानों पर संबंधित विभाग सुचारु रूप से कार्य कर सकें, इसकी व्यवस्था करें। अन्य विभागों के अध्यक्षों को भी ऐसी ही व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। नागरिक सचिवालय की ट्रेजरी और जेएंडके बैंक की शाखा में भी श्रीनगर व जम्मू दोनों जगह से काम होगा। वित्त आयुक्त से इसके लिए तंत्र विकसित करने के लिए कहा गया है।
नागरिक सचिवालय में डिस्पेंसरी भी दोनों जगह पर काम करेगी। श्रीनगर नगर निगम से कहा गया है कि वह श्रीनगर सचिवालय व दरबार मूव कर्मचारियों की कॉलोनियों, होटलों में सैनिटाइजेशन का पर्याप्त बंदोबस्त करे।
कश्मीर आधारित दरबार मूव कर्मचारियों को श्रीनगर पहुंचाने के लिए 25 और 26 अप्रैल को जेकेएसआरटीसी की परिवहन सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी। सामान्य प्रशासनिक विभाग इसके लिए व्यवस्था करेगा और पास भी जारी करेगा। जरूरत के अनुसार एस्टेट विभाग को दरबार मूव स्टाफ के लिए आवासीय सुविधा का प्रबंध करने के लिए कहा गया है। कर्मचारियों से कहा गया है कि वह जम्मू या श्रीनगर में किसी एक स्थान पर ही अपने राशन कार्ड का प्रयोग करें।
सचिवालय जम्मू व श्रीनगर के खुलने का समय चार मई से सुबह साढ़े नौ बजे से शाम साढ़े पांच बजे तक का होगा। सचिवालय के बाहर दरबार मूव के कार्यालयों में कामकाज का समय सुबह दस से शाम चार बजे का होगा। 15 जून के बाद इस नई व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी।
दरबार मूव की व्यवस्था 1872 में डोगरा शासनकाल में शुरू हुई हुई थी। तत्कालीन महाराजा रणवीर सिंह ने राज्य की भौगोलिक और प्राकृतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यह परंपरा शुरू की थी। इसके तहत छह-छह महीने जम्मू व श्रीनगर में दरबार रहता है। दरबार मूव पर सालाना 600 करोड़ रुपये खर्च होते हैं।
उधर, पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेशनल कांफ्रेंस उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने नई व्यवस्था की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार को इस आदेश को तत्काल वापस लेना चाहिए। कोरोना का खतरा कम होने तक दरबार मूव की प्रक्रिया को रोक देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि दोनों संभाग में मूव कार्यालयों में काम होने से लोगों के बीच भ्रम की स्थिति उत्पन्न होगी। लोग यह नहीं समझ पाएंगे कि किस सचिवालय में काम के लिए संपर्क किया जाए।
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि बिना फाइलों और वरिष्ठ अधिकारियों के श्रीनगर में सचिवालय क्या काम करेगा। कश्मीर के ज्यादातर कर्मचारी जम्मू में हैं तो श्रीनगर सचिवालय को कौन चलाएगा? यदि श्रीनगर सचिवालय में कोई कर्मचारी, कोई अधिकारी या कोई फाइल नहीं होगी तो सचिवालय किसके लिए खुलेगा?