चीफ जस्टिस गीता मित्तल और जस्टिस रजनीश ओसवाल की खंडपीठ ने जनहित याचिका का स्वत: संज्ञान लेते हुए मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि केंद्र सरकार तय करे कि दरबार मूव की आवश्यकता है या नहीं। हाईकोर्ट ने अपने निर्णय को केंद्रीय गृह सचिव और प्रदेश के मुख्य सचिव को भेजने के निर्देश दिए हैं, ताकि इसकी समीक्षा हो और इस पर कोई निर्णय लिया जा सके।
दरबार मूव से हर छह महीने में 200 करोड़ रुपये का खर्च होता है। हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए 93 पन्नों में फैसला लिखा है। खंडपीठ ने सीनियर एडवोकेट मोनिका कोहली के सुझावों को भी अपने फैसले में सूचीबद्ध किया है, जिसमें उन्होंने आधिकारिक दस्तावेजों को डिजिटल स्वरूप देने का उल्लेख किया है।
अदालत ने कहा कि दरबार स्थानांतरण का मूल और क्रियान्वयन जनहित की अवहेलना करता है। इसका प्रतिकूल प्रभाव विशाल राजकोषीय, सामाजिक और आर्थिक लागतों से संबंधित तथ्यों से स्पष्ट हो जाता है। अदालत ने कहा कि जो तथ्य पेश किए गए, उससे लगता है कि प्रौद्योगिकी और वैज्ञानिक उपलब्धि के बाद भी बदली हुई परिस्थितियों के अनुरूप बदलाव नहीं किया गया।
हमारा न्यायिक विवेक हमें सतर्क करने के लिए विवश करता है अन्यथा हम अपने न्यायिक कर्तव्य या सांविधानिक जिम्मेदारी का निर्वहन करने में विफल हो जाएंगे जो राष्ट्र और जम्मू-कश्मीर खासतौर पर आम महिलाओं और पुरुषों, गरीबों के प्रति है।
हाईकोर्ट ने फैसले में पहला सवाल यह उठाया कि क्या कोई सरकार अपनी राजधानी बदलने के लिए हर छह महीने में 200 करोड़ खर्च करने की क्षमता रखती है। क्या यह एक ऐसे प्रदेश के लिए स्वीकार्य है, जहां के लोग वित्तीय समस्या से जूझ रहे हों।
प्रत्येक दरबार मूव में शामिल सभी कर्मचारियों को 25,000 रुपये भत्ते के रूप में दिया जाता है। इस हिसाब से साल में दो बार होने वाले दरबार मूव में प्रत्येक कर्मचारी को 50 हजार रुपये केवल भत्ता देना पड़ता है। इसके अलावा, 2,000 रुपये प्रति माह का एक अस्थायी भत्ता (टीएमए) भी दिया जाता है जोकि साल भर का 24,000 रुपये होता है।
इस तरह से हर कर्मचारी को प्रति वर्ष 74,000 रुपये का भुगतान किया जाता है। पिछले साल, अप्रैल-मई में गर्मियों में हुए दरबार मूव में 10,112 कर्मचारी शामिल थे। जबकि अक्टूबर-नवंबर में 9,695 लोग शामिल हुए थे। इस हिसाब से 7 अरब, 48 करोड़, 28 लाख, 88 हजार रुपये अप्रैल-मई में हुए दरबार मूव में और 71 करोड़, 74 लाख, 30 हजार रुपये अक्टूबर-नवंबर में हुए दरबार में केवल भत्ते के रूप में सरकारी कोष से कर्मचारियों को दिए गए।