प्रदेश के शिक्षा मंत्री और राज्य सरकार के प्रवक्ता नईम अख्तर ने कहा है कि ईद पर कर्फ्यू लगाना दुर्भाग्यपूर्ण था, लेकिन, लोगों की जान बचाने की खातिर यह जरूरी था।
मजबूरी में सरकार को यह कदम उठाना पड़ा। वर्ष 2010 को दोहराने से बचाने के लिए यह कदम उठाया गया। बकरीद के दिन हुर्रियत (एम) के मीरवाइज उमर फारूक के नेतृत्व में जुलूस निकाला गया था। इसमें कई लोगों की जान खतरे में पड़ गई थी। कर्फ्यू के लिए वे लोग जिम्मेदार हैं जिन्होंने यूएन चलो मार्च का आह्वान किया था।
पत्रकारों से उन्होंने कहा कि बकरीद पर कर्फ्यू लगाना किसी भी सरकार की बेहतर छवि नहीं प्रस्तुत करता, लेकिन, कानून व्यवस्था की स्थिति को बरकरार रखने के लिए ऐसा करना जरूरी होता है।
सरकार यूएन मार्च को किसी भी सूरत में विफल बनाने के लिए कटिबद्ध थी, ताकि किसी प्रकार की जान माल का अब और नुकसान न हो।
उन्होंने कहा कि दो महीने पहले घाटी में लोगों ने खुशी-खुशी ईद मनाई। तब मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती हजरतबल भी गईं थीं। लेकिन, दो महीने बाद बदली हुई परिस्थितियों में लोगों की जान बचाने की खातिर और कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने न पाए, इस वजह से कर्फ्यू लगाने का फैसला किया गया।