प्रशासन द्वारा ईदगाह रैली को बनाया गया विफल
- फोटो : Amar Ujala
श्रीनगर में शनिवार को हुर्रियत (म) द्वारा हवल हत्याकांड और मीरवाइज मोहम्मद फारूक के साथ-साथ अब्दुल गनी लोन की बरसी मनाने के लिए ईदगाह चलो का आह्वान किया गया था, जिसे प्रशासन द्वारा विफल बनाया गया। श्रीनगर के पुराने शहर में प्रशासन द्वारा कर्फ्यू जैसी पाबंदियां लागू की गई थी।
हुर्रियत (म) अध्यक्ष मीरवाइज मोलवी उमर फारूक के पिता मोलवी मोहम्मद फारूक को अज्ञात बंदूकधारों ने 1990 में शनिवार के ही दिन उनके घर में घुसकर मारा था, जबकि अब्दुल गनी लोन वर्ष 2002 में ईदगाह में मोलवी मोहम्मद फारूक की बरसी के चलते आयोजित एक कार्यक्रम में बंदूकधारों की गोलियों का शिकार बने थे।
पुलिस के एक अधिकारी के अनुसार पुराने शहर के 7 थाना क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाले संवेदनशील इलाकों में अमनो कानून की स्थिति बनाए रखने के लिए पाबंदियां लगाई गई थी। उन्होंने बताया कि पुराने शहर के इन इलाकों में एतिहातन तौर पर धारा 144 लागू किया गया था। अधिकारी के अनुसार खान्यार, रैनावारी, नौहट्टा, एमआर गंज, सफाकदल, निगीन और माईसुमा थाना क्षेत्रों में पाबंदियां लागू की गई थी।
प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर ले जाती पुलिस
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हर वर्ष हुर्रियत द्वारा 21 मई को बरसी के अवसर पर कार्यक्रम ईदगाह में आयोजित किए जाते थे लेकिन वर्ष 2010 में घाटी में भड़के हिंसक हालातों के बाद से प्रशासन द्वारा इसे विफल बनाने के लिए पाबंदियां लगाई जाती है।
जहां एक ओर श्रीनगर के पुराने शहर में पाबंदियों के चलते आम जिंदगी प्रभावित रही, वहीं घाटी के अन्य इलाकों में अलगावादियों द्वारा दी गई बंद की कॉल का पूरा असर देखने को मिला। लगभग सभी दुकानें, कारोबार आदि बंद रहे, जबकि सड़कों पर यातायात ना के बराबर दिखा।
श्रीनगर के पुराने शहर में हालातों की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए पुलिस और सीआरपीएफ के जवानो को भारी संख्या में तैनात किया गया था, ताकि ईदगाह चलो को विफल बनाया जा सके।
ईदगाह के कब्रिस्तान जहां मीरवाइज और लोन को दफनाया गया है, वहां की ओर जाने वाली सभी सड़कें सील की गई थी। इन सब पाबंदियों के बावजूद आवामी एक्शन कमेटी के समर्थकों द्वारा नौशेरा से ईदगाह की ओर रैली निकालने की कोशिश की गई, लेकिन पुलिस ने उन्हें ऐसा करने से रोका और दर्जनों समर्थकों को हिरासत में लिया गया।