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लुप्त हो रही लोक कलाओं के डॉक्यूमेंटेशन की योजना नहीं चढ़ी परवान

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जम्मू। राज्य में लुप्त होती लोक कलाओं के डॉक्यूमेंटेशन की योजना परवान नहीं चढ़ पाई है। 2017 में राज्य कला संस्कृति और भाषा अकादमी ने राज्य की 50 लोक कलाओं का डाक्यूमेंटेशन करना का फैसला लिया था। इस योजना पर 50 लाख रुपये का खर्च आना था। हर एक लोक कला के डाक्यूमेंटेशन पर एक लाख का बजट था। डाक्यूमेंटेशन के लिए अकादमी के पास 180 से अधिक आवेदन भी आए थे, लेकिन अकादमी के पास पर्याप्त प्लानिंग नहीं होने से योजना अधर में लटकी हुई है।
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राज्य में दुर्लभ लोक कलाओं का डाक्यूमेंटेशन कर उनका संग्रह किया जाना था। इसमें 40 मिनट की डॉक्यूमेंटरी में डोगरी, कश्मीरी, लद्दाखी, पहाड़ी, गोजरी और विभिन्न क्षेत्रों के लोक नृत्य, संगीत, शादी संगीत और अन्य लोक परंपराओं से जुड़ी कलाओं का संग्रह के रूप में तैयार करना था। 2017 में अकादमी की ओर से योजना को शुरू किया था। उस समय के अकादमी के सेक्रेटरी डॉ. अजीज हाजनी की अध्यक्षता में डाक्यूमेेंटेशन करने के लिए आए आवेदकाें के लिए काउंसिल कमेटी का गठन किया। कमेटी ने डाक्यूमेंटेशन के लिए आवेदकों की योग्यता की जांच करने थी। कमेटी ने 180 के करीब आए आवेदकों में 50 का चयन करना था। डाक्यूमेंटेशन की योजना 2019 तक पूरा करनी थी। अकादमी के सेक्रेटरी के सेवा निवृत्त होने के बाद बाद योजना ठंडे बस्ते में पड़ी है। योजना से जुड़े और अकादमी के एक अधिकारी ने बताया कि 50 लोक कलाओं का डाक्यूमेंटेशन कर काफी मुश्किल काम है। योजना को शुरू करने से पहले पर्याप्त प्लानिंग नहीं होना से योजना को पूरा करना काफी मुश्किल है। वहीं जम्मू से दरबार मूव होने के बाद श्रीनगर में योजना के तहत काम होना था।
स्थायी सेेक्रेटरी नहीं होने से अटकी योजना
कल्चर अकादमी के पास स्थायी सेक्रेटरी नहीं होने से डाक्यूमेंटेशन की योजना ठंडे बस्ते में। पूर्व सेेक्रेटरी डॉ. अजीज हाजनी के सेवानिवृत्त होने के बाद से योजना पर कोई काम नहीं हुआ है। 2019 तक इस योजना को पूरा करना था, लेकिन अभी तक योजना के कहत कोई काम नहीं हो रहा है।
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सरकार की एजेंडे में कल्चर सबसे पीछे
सरकार की एजेंडे में कल्चर सबसे पीछे है। हमारी पहचान हमारी लोक संस्कृति और परंपराएं हैं। आज के समय में डुग्गर प्रदेश की लोक संस्कृति लुप्त होती है। इन कलाओं का डाक्यूमेंटेशन करना समय की मांग है ताकि भविष्य में हमारी युवा पीढ़ि इससे जुड़ी रहे। अकादमी में सेक्रेटरी नहीं होने से ऐसे योजनाएं सब से अधिक प्रभावित होती है।
- ललित मंगोत्रा, अध्यक्ष डोगरी संस्था
डाक्यूमेंटेशन प्राथमिकता होनी चाहिए
लोक कलाएं लुप्त होती जा रही है। इनका डाक्यूमेंटेशन करना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। अकादमी की पहले और आखिरी प्राथमिकता लोक कलाओं का संरक्षण करना होना चाहिए। डुग्गर प्रदेश की लोक संस्कृतियाें का खजाना है जो लुप्त होती जा रही है। अगर अकादमी ने ऐसे योजना बनाई थी जो उसे समय पर पूरा करना उनकी प्राथमिकता होना चाहिए थी। लोक कलाआें का संरक्षण करना उनको संग्रह के रुप में आने वाली पीढ़ि के लिए बचना समय की मांग है।
- मोहन सिंह, डुग्गर मंच
क्या कहते हैं लोक संगीतकार
डोगरी लोक संगीतकार गिरधारी लाल ने कहा कि डोगरी लोक परंपराएं लुप्त हो रही हैं। इनका संग्रह करना समय की मांग है। लोक कलाओं के डाक्यूमेंटेशन को लेकर अकादमी की सुस्त रैवया निराशाजनक है।
पल्ला झाड़ रहे अकादमी के अधिकारी
लुप्त हो रही लोक कलाओं के डॉक्यूमेंटेशन पर कल्चर अकादमी के अधिकारी पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं। इस मुद्दे पर बात करते से कतरा रहे हैं। अकादमी के इस रुख पर कला प्रेमियों में नाराजगी है। अकादमी के सचिव का कार्यभार देख रहे मुनीर उल इस्लाम ने कहा कि उनके पास बात करने का समय नहीं है।
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