जम्मू। राष्ट्र के लिए सामरिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण होने के अलावा श्रीनगर-लेह-कारगिल हाईवे को ऑल वेदर बनाने के लिए जरूरी एशिया की सबसे लंबी 14.2 किलोमीटर लंबी रोड टनल कयासों के पेंच में फंस कर रह गई है।
जनवरी 2018 में मुंबई आधारित आईएलएंडएफएस कंपनी को 6808 करोड़ की राशि से जोजिला रोड टनल के निर्माण का ठेका हासिल हुआ था। मई 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लद्दाख का दौरा कर टनल निर्माण की आधार शिला भी रखी थी। निर्माण एजेंसी की तरफ से कुछ महीने काम भी किया गया, लेकिन मार्च 2019 को आईएलएंडएफएस कंपनी ने वित्त संकट की वजह से काम छोड़ दिया और इस कंपनी से केंद्र सरकार ने करार रद्द कर दिया। तब से अब तक नए सिरे से निर्माण एजेंसी की तलाश की जा रही है। इरकान इंटरनेशनल तक इस दौड़ में शामिल हो चुकी है, लेकिन अभी तक किसी कंपनी से नया करार नहीं हुआ है।
जोजिला टनल का निर्माण कार्य अधर में लटक जाने के चलते कारगिल और लेह पहाड़ी स्वायत्त विकास परिषद के काउंसलर राज्यपाल सत्यपाल मलिक से मिलकर जोजिला टनल का निर्माण जल्द शुरू करवाने की गुहार लगा चुके है।
उल्लेखनीय हैं कि जोजिला टनल के निर्माण के प्रस्ताव पर केंद्र की यूपीए दो सरकार की कैबिनेट ने अक्तूबर 2013 में मंजूरी दी थी। मई 2017 में मोदी सरकार के समय चार कंपनियों ने निर्माण कार्य की इच्छा जताते हुए बोली दी। चिनैनी नाशरी टनल का निर्माण करने वाली कंपनी आईएलएंडएफएस ने सबसे कम राशि 4899 करोड़ में टनल निर्माण की बोली दी और केंद्रीय कैबिनेट ने जनवरी 2018 में 6808 करोड़ की राशि जिसमें भूमि अधिग्रहण राशि भी शामिल थी को पांच साल में पूरा करने का करार आईएलएंडएफएस कंपनी से किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मई 2018 में परियोजना की आधार शिला भी रख थी और काम भी शुरू हुआ लेकिन मार्च 2019 में कंपनी दिवालिया घोषित हो गई टनल का निर्माण कार्य अधर में लटक गया।
चीन, पाकिस्तान के सीमा के करीब है जोजिला
जोजिला टनल चीन और पाकिस्तान से लगती सीमाओं के करीब होने से सामरिक दृष्टि से भी काफी अहमियत रखती है। वर्तमान में श्रीनगर कारगिल लेह मार्ग साल में केवल छह महीने ही खुला रहता है। भारी हिमपात के चलते छह महीने कोई वाहन सड़क पर नहीं दौड़ पाता। सेना को हवाई मार्ग से ही लद्दाख में पाकिस्तान, चीन सीमा पर सैनिकों के अलावा जरूरी सामान पहुंचाना पड़ता है। जोजिला टनल के निर्माण के बाद 12 महीने यह मार्ग नागरिकों के अलावा सुरक्षा बलों के लिए खुलने से इस क्षेत्र में विकास का नया दौर शुरू होगा और सेना को भी सामरिक दृष्टि से मजबूती मिलेगी।