दूरसांबा। चाढ़क बिरादरी ने महारजा हरि सिंह को महान शख्सियत और दूरदर्शी सोच का धनी करार दिया है। चाढ़क बिरादरी ने उनके जन्मदिवस पर राजकीय अवकाश की मांग दोहराई है।
एकल राजपूत बिरादरियों में प्रमुख बिरादरी के महासचिव अशोक चाढ़क ने एक बयान में कहा कि महाराजा हरि सिंह की अनेक उपलब्धियां काबिले तारीफ है। जिनमें सब को समान अधिकार, रियासत की विशेष पहचान, प्रजा सभा के चुनाव सहित रियासत का हिंदुस्तान में विलय आदि प्रमुख हैं। केंद्र सरकार की बेरुखी के बावजूद महाराजा ने पाकिस्तान के प्रस्ताव को ठुकराया था। 1931 में ब्रिटेन में आयोजित गोलमेज कांफ्रेंस में हिंदुस्तान के राजाओं को प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने ही सर्वप्रथम घोषणा की थी कि अंग्रेजों के देश छोड़ने पर वह पहले राजा होंगे। जो अपनी रियासत का देश में विलय कर देंगे। यह अलग बात है कि बाद में केंद्र की नीति के कारण इसमें विलंब हुआ।
अशोक चाढ़क ने कहा कि देश में लोकतंत्र आजादी के बाद आरंभ हुआ। जम्मू कश्मीर में महाराजा ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया 1938 में ही लागू की हुई थी। बिरादरी अध्यक्ष राकेश चाढ़क ने महाराजा के सितंबर माह में आने वाले जन्मदिवस पर हर वर्ग हर जाति से एकजुट होकर आवाज उठाने का आग्रह किया। बिरादरी संघ प्रतिनिधियों ने राजकीय कर्मियों से आग्रह किया कि इस वर्ष महाराजा के जन्मदिवस पर सब विरोध स्वरूप एक दिवसीय छुट्टी लें। ताकी सरकार पर दबाव बनं।
उल्लेखनीय है कि अमर क्षत्रिय राजपूत सभा इस संदर्भ में हर वर्ष मांग उठाती है। चाढ़क बिरादरी ने हर बिरादरी से इस बाबत आपसी सहयोग की मांग की है। क्योंकि राजनीति से ऊपर उठ कर सब को आवाज उठानी चाहिए। क्योंकि महाराजा हरी सिंह हर जाति हर वर्ग के राजा थे।