फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बाबा चमलियाल मेले में स्थानीय लोगों ने मजार पर चढ़ाई चादर

विज्ञापन
भारत-पाकिस्तार सीमा पर रामगढ़ में स्थिति बाबा चमलियाल की दरगाह।
विज्ञापन
सांबा। जिले के रामगढ़ के दग गांव में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित बाबा (दलीप सिंह मन्हास) चमलियाल दरगाह पर मेला दोनों मुल्कों के लिए शांति का प्रतीक रहा है। प्रत्येक वर्ष जून के अंतिम वीरवार को यहां मेले का आयोजन होता है। इसमें लाखों की संख्या में श्रद्धालु शिरकत करते हैं। भारत पाकिस्तान दोनों देशों के श्रद्धालुओं की बाबा में पूरी आस्था है। वीरवार को यहां स्थानीय लोगों की तरफ से परंपरा के अनुसार बाबा की मजार पर चादर चढ़ाई जाएगी।
विज्ञापन

भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित बाबा चमलियाल दरगाह पर दो देश के लोगों की आस्था और श्रद्धा का प्रतीक है। बजाया जाता है कि करीब तीन वर्ष पूर्व दलीप सिंह चर्म रोग का इलाज करते थे। इस इलाज के जरिये वे काफी लोकप्रिय होने लगे। उनकी बढ़ती लोकप्रियता से कुछ लोगाें को ईर्ष्या होने लगी और उन्हें एक दिन सैंदावली गांव (अब पाकिस्तान में) इलाज कराने के बहाने बुलाया, और उनका कत्ल कर दिया। हमले के दौरान वह वहां से लौटे तो उनका सिर सैंदावाली गांव में गिरी और धड़ रामगढ़ के दग गांव में गिरा। इस तरह से पाकिस्तान के सैंदावाली गांव में भी बाबा की मजार है। जहां जून में एक सप्ताह का मेला लगता है। पाकिस्तान के श्रद्धालु बाबा की मजार पर चादर चढ़ाने के लिए लाते हैं। वह पाकिस्तानी रेंजरों को चादर देते हैं और वह बीएसएफ के जवानों को पूरी रस्म के सौंपते हैं। इस तरह से वह चादर बाबा की मजार पर चढ़ाई जाती रही है।
------
1971 में हुए युद्ध के बाद बंद हो गई रस्म
जानकारों के अनुसार 1971 से पहले पाकिस्तानी श्रद्धालु बाबा की मजार पर आकर चादर चढ़ाते थे, लेकिन भारत-पाक के मध्य 1971 में हुए युद्ध के बाद यह रस्म बंद हो गई। बाद में पाकिस्तानी श्रद्धालु चादर रेंजरों को देने लगे। भारत-पाक की जीरो लाइन पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया जाता था, जिसमें पाकिस्तानी रेंजर व सिविल प्रशासन के अधिकारी व उनके परिवार भी जीरो लाइन पर पहुंचते थे। इसमें बीएसएफ व भारतीय प्रशासन के अधिकारी कार्यक्रम में पहुंचते थे। दोनो देशों के अधिकारी एक दूसरे को उपहार देते थे। सभी दुश्मनी भूल कर बाबा चमलियाल को नमन करते। कुछ समय के लिए दोनों देशों की दूरियां मिट जाती थीं।
विज्ञापन

------
पाकिस्तानी श्रद्धालुओं को शक्कर शर्बत भी नहीं दिया जा रहा
दो वर्ष पूर्व पाकिस्तानी रेंजरों ने चमलियाल पोस्ट के अग्रिम मोर्चे पर बीएसएफ के दो अधिकारियों और दो जवानों को शहीद कर दिया था, जिस पर जीरो लाइन पर होने वाले कार्यक्रम को स्थगित कर दिया गया व पाकिस्तानी श्रद्धालुओं को शक्कर शर्बत भी नहीं दिया जा रहा है। अब कोरोना महामारी के चलते धार्मिक स्थलों पर ताले लगने पर बाबा चमलियाल मेला रद्द कर दिया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें