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शांति का प्रतीक बाबा चमलियाल मेला रद्द

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सांबा के रामगढ़ मे बाबा चामलियाल दरगाह। - फोटो : SAMBA
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सांबा। रामगढ़ में भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा की जीरो लाइन पर लगने वाला बाबा चमलयाल मेला जिला प्रशासन की ओर से रद्द कर दिया गया है। कोरोना के चलते सरकार की ओर से सभी धार्मिक स्थलों पर होने वाले कार्यक्रम रद्द किए गए हैं। इसको लेकर इस बार बाबा चमलियाल मेला नहीं होगा। जबकि स्थानीय लोग अपनी ओर से बाबा की मजार पर चादर चढ़ा कर रस्म पूरी करेंगे।
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जानकारों के अनुसार तीन सौ वर्ष पूर्व दग गांव में बाबा दलीप सिंह मन्हास रहते थे। वह दाद व चर्म रोग का उपचार करते थे, उनकी प्रसिद्धि बढ़ने लगी। क्षेत्र के ही कुछ लोग उनकी प्रसिद्धि से दुखी होने लगे। एक दिन कुछ शरारती तत्वों ने सैदांवली गांव (अब पाकिस्तान में) में बाबा का कत्ल कर दिया। बाबा की गर्दन वहां गिर गई जबकि शरीर चमलियाल में गिरा। जहां पर बाबा की मजार बनाई गई है। एक दिन बाबा के एक भक्त को बाबा ने सपने में दर्शन दिए व कहा कि दरगाह के निकट कुएं का पानी जिसे शर्बत कहते हैं व तालाब की मिट्टी जिसे शक्कर कहते हैं, दोनों को मिला कर चर्म रोग पर लगाएं तो ठीक हो जाएगा। बाद में दोनों देश के लोग बाबा की मजार पर चादर चढ़ाते थे व शक्कर शर्बत लेते थे। पाकिस्तानी श्रद्धालुओं को भी शक्कर शर्बत दिया जाता था, लेकिन दो वर्ष से दोनों देशों के बीच बनी तलखी के कारण पाकिस्तान को शक्कर शर्बत नहीं दिया जा रहा है।
अब कोरोना महामारी के चलते जिला प्रशासन की ओर से मेला रद्द कर दिया गया है। स्थानीय निवासी एवं बाबा चमलियाल कमेटी के प्रधान बिल्लु चौधरी के अनुसार वह अपने गांव की ओर से बाबा की मजार पर चादर चढ़ा कर रस्म पूरी करेंगे।
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