मानसर झील पर मछलियों को आटा देने के लिए बनाया गया मंच।
सांबा। सरुइसर-मानसर विकास प्राधिकरण में 27 लाख के टेंडर में हेराफेरी का मामला सामने आया है। जम्मू-कश्मीर पर्यटन विकास प्राधिकरण डाक बंगला मानसर के सामने मछलियों को चार खिलाने के लिए बने जेट्टी एक के पुनरोद्धार के लिए ठेकेदार ने 27 लाख में ठेका हासिल किया था परंतु उसने रंगरोगन कर दिया जेट्टी 2 का। जो पहले से ही बेहतर स्थिति में थी। इस काम का भुगतान भी हो चुका है। अब मामला सामने आने पर अधिकारी बगलें झांकते नजर आ रहे हैं। कोई बोलने के लिए तैयार नहीं है। एक्सईएन केएल भगत का कहना है कि काम सही हुआ है परंतु भूलवश बिल में जेट्टी 2 लिख दिया गया है।
बताया जाता है कि सरुइसर-मानसर विकास प्राधिकरण के अधिकारियों ने 19 दिसंबर 2019 को जेकेटीडीसी डाक बंगला मानसर के सामने जट्टी न.1(मछलियों को आटा डालने के लिए बनाए लकड़ी के मचान) की खस्ताहालत को देखते हुए 35 लाख का टेंडर निकाला। इसे एक ठेकेदार ने 27 लाख का टेंडर डाल कर काम ले लिया, लेकिन विभाग के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से ठेकेदार ने जट्टी नम्बर1 के बजाए काम जट्टी नम्बर 2 का किया। क्योंकि जट्टी न. 2 की हालत ठीक थी, जिस पर खर्च भी कम ही आना था। इसको देखते हुए ठेकेदार ने विभाग के कुछ अधिकारियों से सांठगांठ करके जिस जट्टी न.1 पर खर्च ज्यादा आना था, उसकी हालत काफी खराब थी उसको छोड़ दिया, जबकि जट्टी न.2 पर ख़र्च कम आना था, जिसको रंग रोगन कर चमका दिया और उसका 27 लाख के बिल का भुगतान करा लिया। इस संबंध में जब विभाग के एक्सईएन केएल भगत से जानकारी चाही तो उन्होंने पहले तो मिलने से मना कर दिया। बाद में विभाग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी से मिलने को कहा। कार्यालय पहुंचने पर सीईओ ने एक्सईएन को जानकारी देने को कहा।
-इंजीनियर देते हैं इस्टीमेट
विभागीय अधिकारियों से जब यह जानकारी चाही गई कि 27 लाख में जो लकड़ी का मचान बनाया है उतने पैसे में तो कंक्रीट का बनाया जा सकता था, लेकिन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यह आंकलन उनके इंजीनियर देते हैं।
कोट..
मैंने जेट्टी नम्बर एक का ही काम कराया है और बिल में गलती से जेट्टी नम्बर दो लिख दिया गया है। जट्टी न.2 लिख दिया गया है।
-केएल भगत, एक्सईएन।