आरएस पुरा / मीरां साहिब। उपजिले में बुधवार को कई स्थानों पर लोगों ने छबील लगाई। इसमें राहगीरों को ठंडा शर्बत पिलाया गया। कई लोगों ने घरों में पूजा करने के साथ दान किया। कई लोगों ने मंदिरों में पहुंच विधि पूर्वक पूजा-अर्चना करने के साथ दान किया।
रामेश्वरधाम के स्वामी प्रकाशानंद ने कहा कि तमदेह के दिन पूजा करने के साथ दान करते हैं। कई परिवार के लोग बेटियों को स्टील के बर्तन सहित अन्य सामान का दान करते हैं। इसी प्रकार कई भक्तजन मंदिरों में दान करने के साथ छबीलें लगा लोगों को जलपान कराते हैं। बुधवार को कस्बे में कई स्थानों पर राहगीरों को मीठा पानी पिलाया। कस्बे के तहसील बाजार में दुकानदारों द्वारा छबील लगाकर राहगीरों को जलपान कराया।
विक्रम संधू ने कहा कि तमदेह के दिन इंद्र देवता को प्रसन्न करने के लिए मीठे पानी की छबील लगाई गई, ताकि बारिश होने पर लोगों को गर्मी से राहत मिलने के साथ किसानों को खेतीबाड़ी के लिए सुविधा हो। वहीं मीरां साहिब कस्बे के बाजार सहित कई गांव में लोगों द्वारा ब्रेड न्यूटरी का स्टाल लगाकर लोगों को शरबत पिलाया। डॉ. दीपक रैना ने बताया कि हर वर्ष तमदेह के दिन छबील लगा राहगीरों को जलपान कराया जाता है। इस दौरान दवेंद्र पप्पू, टिंकू शर्मा, दीपक सहित क्षेत्र के कई गण्यमान्य लोग भी मौजूद रहे।
तमदेह एकादशी पर लोगों ने व्रत रखा
विजयपुर। तमदेह एकादशी पर बुधवार को लोगों ने स्नान कर पूजा अर्चना की और व्रत रखा। लोगों ने पितरों को खुश करने के लिए जल फल आदि गरीबों को दान दिया और घर परिवार में सुख शांति की कामना की। इस दौरान लोगों ने एकादशी कथा सुनी। क्षेत्र की गीता, राधा देवी, किरण आदि ने बताया कि इस दिन व्रत रखने से और कथा सुनने से घर परिवार में सुख शांति बनी रहती है। संवाद
तमदेह पर्व धूमधाम से मनाया
बाड़ी ब्राह्मण। तमदेह पर्व बुधवार को धूमधाम और श्रद्धापूर्वक मनाया गया। सुबह से ही लोगों का परिजनों के प्रति सम्मान देने के लिए मिट्टी के घड़े, फल, पकवान राशन और अन्य चीजें इकट्ठी कर ली गई, और अपने पूर्वजों की याद में विधि अनुसार इन सबको एकत्रित किया गया। दिन भर पितरों की याद में पूजा-अर्चना की गई।
तमदेह पर्व को लेकर लोगों में काफी उत्सुकता देखा गया। बाजारों में भी खरीदारी के लिए रौनक रही। सुबह से ही लोगों में मिट्टी के बर्तन, फल, पकवान इत्यादि की खरीदारी करते लोग बाजारों में नजर आए। इस मौके पर फलों में ककड़ी, आम की बड़ी मात्रा में खरीदारी की गई। दोपहर तक ककड़ी की किल्लत भी इलाके में देखने को मिली। मांग के अनुसार ककड़ी पूरी नहीं हो पाई। हालांकि उसकी खानापूर्ति करने के लिए लोगों ने आम की खरीदारी बड़े पैमाने पर की। संवाद
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परगवाल में श्रद्धापूर्वक मनाया गया तमदेह पर्व
परगवाल। हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखने वाली अषाढ़ संक्रांति एवं पितरों की आत्मा की शांति के लिए मनाया जाने वाला तमदेह पर्व मंगलवार को सीमा क्षेत्र परगवाल में धार्मिक आस्था के साथ श्रद्धापूर्वक मनाया गया। सुबह से ही लोगों ने राहगीरों के लिए छबील लगाई। नवदुर्गा पैदल यात्रा कमेटी ने मुख्य बाजार में लंगर के साथ छबील लगाकर आने-जाने वालों को शीतल जल पिलाया। उसके अलावा इस पर्व पर लोगों ने अन्न, पंखी, फल, आशन, मिट्टी के बर्तन इत्यादि पंडितों को दान किया। ऐसी मान्यता है कि इस दिन दान करने से वह पूर्वजों तक पहुंचता है। वहीं परगवाल के दूसरे गांवों में भी तमदेह का पर्व धूमधाम से मनाए जाने की सूचना है। संवाद
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पूजा अर्चना करके देवी देवताओं को याद किया
अखनूर। सीमावर्ती क्षेत्र में तमदेह पर्व बुधवार को बड़ी धूमधाम के साथ मनाया गया। लोगों ने घरों में ही पूजा अर्चना करके देवी देवताओं को याद किया। कस्बे के बाजारों और मंदिरों में भंडारे और शीतल जल के स्टाल लगाए गए।
लोगों का कहना है कि तमदेह पर घरों में ही पूजा अर्चना की गई। मंदिरों में भी सादे तरीके से कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कस्बे के मुख्य चौक, मुख्य बाजार, बस अड्डा, फव्वारा चौक में भंडारा लगाया गया। आवाजाही करने वाले लोगों को खाना वितरित किया गया। वहीं चौकी चोहरा, सौहल, जंडियाल, अगोर सहित अन्य क्षेत्रों में भी भंडारा और छबील लगा करके लोगों को भोजन और ठंडा पानी वितरित किया गया। संवाद
सांबा में लोगों ने सरोवरों में किया स्नान
सांबा। संक्रांति एवं तमदेह पर लोगों ने धार्मिक स्थलों पर बने सरोवरों में स्नान कर मंदिरों में पूजा अर्चना की। बाद में पितरों को खुश करने के लिए बर्तन व फल दान किए। डोगरी संस्कृति में तमदेह पर बहन व बेटियों को बर्तन व फल दान में दिए जाते हैं, जो पुरानी रीत चली आ रही है, जिसे आज भी जिंदा रखा है। इस दिन लोग अधिक से अधिक दान करते हैं। संवाद