रामगढ़। क्षेत्र में सोमवार को विजय दिवस पर 17 गरेवाल राइफल सेना के जवानों ने शहीदों के घरों में जाकर शहीद परिवार के सदस्य को सम्मानित किया। वहीं नंदपुर के शहीद हवलदार सूरम सिंह की पत्नी निर्मल कुमारी को सिलाई मशीन और शाल ओढ़कर सम्मानित किया।
शहीद नेक रशपाल सिंह, पत्नी कमलेश कुमारी निवासी शेखपूर को भी शाल देकर सम्मानित किया। गीत सैनी शहीद सूबेदार कर्नेल सिंह निवासी शिवूचक में जाकर शहीद की पत्नी को सम्मानित किया। वहीं निर्मल कुमारी, कमलेश कुमारी, गीत ने कहा कि हमें दुख है कि हमने पति को खोया है। उसके साथ-साथ हमें खुशी भी है कि हमारे पति देश की सेवा करते शहीद हुए हैं। शहीद के परिवारों ने कहा कि अगर कोई भी दिन त्योहार आने पर सेना के जवान हमारे साथ जरूर समय खड़े होते हैं। हमें बहुत खुशी होती हैं।
कारगिल युद्ध के शहीद गुरदीप के योगदान को किया याद
रामगढ़। क्षेत्र में सोमवार को विजय दिवस पर शहीद गुरदीप सिंह को याद किया। वर्ष 1999 कारगिल युद्ध के दौरान शहीद हुए गुरदीप सिंह सोनी को 22वें शहीदी दिवस पर श्रद्धांजलि दी गई। आठ सिख रेजीमेंट के सिपाही शहीद गुरदीप सिंह के शहीदी दिवस पर परिजनों, राजनेताओं, सैन्य अधिकारियों व गणमान्य लोगों ने उनको श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
सेना मेडल से सम्मानित शहीद के पैतृक गांव शेखुपुर पलोटा स्थित शहीद स्मारक स्थल पर श्रद्धांजलि समारोह में पूर्व राज्य मंत्री स. मंजीत सिंह विशेष तौर पर उपस्थित थे। सभी ने दो मिनट का मौन रखकर उनकी आत्मिक शांति के लिए प्रार्थना की। समारोह में सैनिक सम्मान देने की रस्म स्थानीय 7 जैक राइफल के जवानों ने की और शहीद की निजी रेजीमेंट के अधिकारियों ने भी शहीद जवान को श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर पारिवारिक सदस्य पिता स. मोहन सिंह, माता मंजीत कौर, बहनें कुलविंदर कौर, रजिंद्र कौर, जसविंदर कौर, पूर्व कैप्टन बलजीत सिंह, पूर्व सरपंच बलवत सिंह नागरा, तीर्थ राम भगत, बचन लाल अन्य ने भी उनकी शहादत को नमन किया। शहीद सिपाही गुरदीप सिंह सोनी की आत्म शांति के लिए अखंड पाठ और श्री अखंड पाठ भोग का भी आयोजन किया गया। मां की आंखों से आज भी छलक आते हैं आंसू, कारगिल युद्ध में इकलौते बेटे को खो चुकी माता मंजीत कौर की आंखें हमेशा पुत्र के वियोग में नम रहती हैं। जिन शहीद वीरों की शहादत पर पूरा देश गर्व महसूस करता है वहीं एक मां-बाप के लिए उसके जवान बेटे का शहीद होना किसी दर्द से कम नहीं होता। शहीद गुरदीप सिंह सोनी के 22 वें शहीदी दिवस पर जहां हर कोई उनको श्रद्धा सुमन भेंट कर रहा था। दूसरी तरफ शहीद की मां मंजीत कौर की आंखों से आंसुओं के सैलाब उमड़ रहे थे। महिलाएं उनको ढांढस बंधाने की कोशिश कर रही थीं।
विजय दिवस पर वीरचक्र से सम्मानित हवलदार को दी श्रद्धांजलि
07 मई 1992 में कारगिल में आतंकियों के साथ लोहा लेते हुए थे शहीद
अरनिया। कस्बे के वीरचक्र से सम्मानित शहीद हवलदार तिलक राज को सोमवार को विजय दिवस के मौके पर श्रद्धांजलि दी गई। उनके शहीद हुए 29 वर्ष बीत चुके हैं, मगर आज भी ऐसा लगता है जैसे वो हमारे आसपास ही हैं।
यह कहना है शहीद परिवार के सदस्यों का, जिन्होंने अपने घर में कारगिल विजय दिवस पर कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें याद किया। जम्मू-कश्मीर राइफल रेजिमेंट के इस बहादुर जवान ने 1992 में कारगिल में किए गए ऑपरेशन रक्षक में आतंकियों के साथ लोहा लेते हुए वतन पर जान न्यौछावर कर दी। इनकी बहादुरी को देखते हुए उन्हें वीरचक्र से नवाजा गया। शहीद तिलक राज को उनकी पत्नी व घर वालों ने श्रद्धांजलि अर्पित कर उनकी आत्मा की शांति के लिए मौन रखा।
डीडीसी सदस्य की अगुवाई में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित
अखनूर। कारगिल शहीद दिलेर सिंह भाऊ की याद में उनके निवास पर उनकी पत्नी और डीडीसी सदस्य शारदा भाऊ की अगुवाई में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें उपस्थित लोगों और एनसीसी कैडेट ने भाग लेकर शहीद दिलेर सिंह भाऊ की तस्वीर के आगे पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। वीर नारी और डीडीसी सदस्य ने देश की रक्षा करते हुए शहीद पति की पत्नी होने पर गर्व की बात कही। देश के हर नागरिक को देश की रक्षा के लिए प्राण लेना चाहिए, तभी दुश्मनों से देश सुरक्षित रहेगा। संवाद