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गुरु पूर्णिमा महोत्सव धूमधाम से मनाया

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गुरू पूर्णिमा पर रामेशवरधाम में पहुचे भक्तजनो को प्रसाद देते स्वामी प्रकाशानंद जी - फोटो : RSPURA
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आरएस पुरा। रामेश्वरधाम में शुक्रवार को स्वामी प्रकाशानंद की अध्यक्षता में गुरु पूर्णिमा महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम में विभिन्न प्रदेश व क्षेत्र के श्रद्धालुओं ने शामिल होकर गुरु पूजन कर आशीर्वाद लिया। शुक्रवार सुबह सैकड़ों की संख्या में पहुंचे भक्तों ने गुरु पूर्णिमा पर्व पर गुरु से आशीर्वाद प्राप्त करने पहुंचे भक्तों ने विधि पूर्वक गुरू का पूजन किया।
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स्वामी प्रकाशानंद ने श्रद्धालुओं को गुरु पूर्णिमा का महत्व बताते हुए कहा कि गुरु के बिना जीवन अधूरा है। आज के दिन जो भी भक्त गुरु के चरणों में पहुंचता है वह पूरे वर्ष का महत्व है। उन्होंने कहा कि गुरु के चरणों में जाने वाले भक्तों पर भगवान सदा अपना आशीर्वाद बनाए रखते हैं। कोरोना के चलते कार्यक्रम के दौरान सामाजिक दूरी बनाए रखने के लिए विशेष तौर पर भक्तों द्वारा व्यवस्था की गई थी। कार्यक्रम में विभिन्न प्रदेश से पहुंचे श्रद्धालुओं ने गुरु पूजन कर आशीर्वाद लिया। कार्यक्रम में पहुंचे भक्तों को कथा का रसपान कराए जाने के साथ पहुंचे संतों ने श्रद्धालुओं को गुरु पूर्णिमा का महत्व बताया। इस दौरान भंडारा लगाया गया, जिसमें पहुंचे भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।
गुरु पूर्णिमा पर्व आस्था के बीच मनाया गया
अखनूर। माता बुआ मंदिर में गुरु पूर्णिमा पर्व आस्था के बीच मनाया गया। इस पर साध्वी ज्योति देवी की अगुवाई में कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना की। इसमें रामायण पाठ के साथ हवन यज्ञ किया गया। हवन में श्रद्धालुओं ने आहुति दी। इस दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान की महिमा का गुणगान किया। महंत ज्योति देवी ने बताया कि हर साल की तरह इस बार भी गुरु पूर्णिमा आस्था और धूमधाम से मनाया गया। कोरोना महामारी पर सामाजिक दूरियों के बीच श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना की। गुरु से आशीर्वाद लिया। क्षेत्र के विभिन्न जगहों से श्रद्धालुओं का आगमन हुआ। वहीं चौकी चौरा, सौहाल, खौड़ सहित अन्य क्षेत्र में भी मंदिर और देवस्थानों में धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। संवाद
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पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं ने किया रखा व्रत
विजयपुर। पूर्णिमा पर लोगों ने शुक्रवार सुबह स्नान कर पूजा अर्चना की और व्रत रखा। उसके बाद सत्यनारायण भगवान की कथा पढ़ी। जानकारी अनुसार शुक्रवार को पूर्णिमा के दिन लोगों ने सुबह धार्मिक स्थानों में स्नान किया। उसके बाद मंदिरों में दो गज की दूरी और मास्क पहन कर पूजा अर्चना की। इस दौरान लोगों ने व्रत रखने के बाद गरीबों में फल आदि दान किया। क्षेत्र की गीता देवी, संध्या कुमारी, राधा रानी, सीमा देवी आदि ने बताया कि इस दिन व्रत रखने से और सत्यनारायण की कथा सुनने से घर परिवार में सुख शांति बनी रहती है। यही कारण है कि लोगों ने पूर्णिमा के दिन पूजा अर्चना की और व्रत रखा। संवाद
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