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भागवत कथा में उमड़े भक्तजन

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आरएस पुरा। संगम पैलेस में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में स्वामी बलवीर शास्त्री ने मंगलवार को गुरु की महिमा का वर्णन किया। कहा कि गुरु के बिना हम जीवन का सार ही नहीं समझ सकते हैं। हमें इसका सदैव ध्यान रखना चाहिए कि गुरु के समक्ष चंचलता नहीं करनी है। सदा ही अल्पवासी होना चाहिए। जितनी आवश्यकता है उतना ही बोलें और जितना अधिक हो सके गुरु की वाणी का श्रवण करें।
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उन्होंने कहा कि गुरु चरणों की सेवा का अवसर मिलना परम सौभाग्य होता है। जो अनमोल है। इसलिए गुरु सेवा को समर्पित भाव से करना और उनके आदेश का पालन सदा ही करना चाहिए। गुुरु की महिमा अपार है। उनकी करुणा अद्भुत है। कब किस पर अनुग्रह हो जाए। प्रभु के अवतार प्रयोजन पर भी कहा गया कि यहां किसी राक्षस, दानव और अधर्मी का वध करने के लिए ही अवतरित नहीं हो, बल्कि अपने भक्तजनों पर कृपा बरसाने के आते हैं। रावण, कंस का वध करने के लिए भगवान को अवतार लेने की जरूरत नहीं थी। उन्होंने कहा कि घर द्वार छोड़कर वन में चले जाना ही वैराग्य नहीं होता, बल्कि अपने अंतकरण की शुद्धता इसमें नितांत आवश्यक है। हमारे जीवन में विचारों का आदान प्रदान रोम-रोम से होता है। इसके लिए सिर्फ नाक, कान और आंखें ही नहीं होती हैं। संत महात्मा की दृष्टि को दिव्य बताते हुए कहा गया कि हम उतना ही देख सकते हैं। जितनी दूर तक हमारी दृष्टि जाती है। इस दौरान सर्व भो सनातन एवं रामायण मंडली अध्यक्ष जोगिन्द्रपाल रैना, कुंदन लाल शर्मा सहित संत समाज के कई लोग भी मौजूद थे। जिन्होंने भक्तजनों को भगवान की लीलाओं का वर्णन कर मंत्रमुग्ध किया।
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सद्दे चक में श्रीमद्भागवत कथा में मनाया श्रीकृष्ण जन्मोत्सव
संवाद न्यूज एजेंसी
घगवाल। तहसील राजपुरा के सीमावर्ती गांव सद्दे चक में चल रही श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह के दौरान मंगलवार को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया गया। सप्ताह में कथा वाचक एवं संत बुआदित्ता ने श्रीकृष्ण जन्मोत्सव में बाल रूपी श्रीकृष्ण के जीवन पर आधारित झांकियां दर्शाई गईं।
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गोपियों संग कान्हा की अठखेलियां व वासुदेव द्वारा श्रीकृष्ण के बाल रूप को टोकरी में उठाया दृश्य पेश किया गया। तो कान्हा-कान्हा व राधे कृष्ण के जयघोष से सप्ताह स्थल गूंज उठा और संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो गया। संत बुआदित्ता ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीला का वर्णन कर सबको मंत्र मुग्ध कर दिया। कलाकारों ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन पर आधारित झांकियां प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। कथा में पहुंचे श्रद्धालुओं के लिए भंडारा लगाया गया।
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