अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। आप जब से उदास बैठे हैं गम मेरे आस-पास बैठे हैं, आज लुटने से बच नहीं सकता सब मेरे खास-खास बैठे हैं... लफ्जों की गूंज अभिनव थिएटर में मंगलवार को सुनाई दी। गीत, गजलों और कविताओं से शाम गुलजार रही। एक बार रचनाएं पढ़ने का सिलसिला घंटों चलता रहा। एलजी मनोज सिन्हा खुद ढाई घंटे मुग्ध होकर रचनाओं का आनंद लेते रहे। चाहने वाले हर बात, हर शेर पर दाद दे रहे थे। एलजी के जाने के बाद श्रोताओं की कमी जरूर खली, लेकिन कलाकारों का हौसला कायम रहा।
लाफ्टर चैंपियन फेम प्रताप फौजदार मुख्य आकर्षण थे। उन्होंने लोट-पोट करने वाले अंदाज को बरकरार रखते हुए एक से बढ़कर एक किस्से सुनाए। इन किस्सों में वे प्रमुख सचिव संस्कृति बृजमोहन शर्मा को लपेटने से भी नहीं चूके। ऐसा नहीं कि केवल प्रताप फौजदार ने तालियां बटोरीं। उनसे पहले और बाद में आए कलाकारों ने भी शानदार रचनाएं पेश कीं। कार्यक्रम की शुरुआत श्वेता सिंह की ओर से सरस्वती वंदना दे दे आशीष शारदे...के साथ की गई। दिल्ली से आए अनिल अग्रवंशी ने लोटपोट कर देने वाले हरियाणवी अंदाज के बीच अपने इरादे ये कहकर जताए, हर मर्ज ठीक होता नहीं दवा खाने से, कुछ दर्द दूर हो जाते हैं हंसने हंसाने से।
डोगरी कवयित्री चंचल डोगरा ने हम रिपेयर करते लोग ऐसे ही हैं...कविता के जरिये बीते जमाने की बातें याद दिलाई तो कार्यक्रम का दमदार संचालन कर रहे विक्रमादित्य पुरस्कार से सम्मानित दिनेश दिग्गज ने टूटा मृदंग लेने की जरूरत क्या थी, पतंग लेने की जरूरत क्या थी, जब पता था शेर असली है, सेल्फी शेर के संग लेने की जरूरत क्या थी...जैसी पंक्तियों से सभी को हंसने पर मजबूर कर दिया। कवि अनुज त्यागी ने बर्बाद सब लगे, कभी-कभी लगे आबाद हैं...। सुनाकर अपने दिल की बात कही। कवयित्री बिंदिया टिक्कू ने सुन ले विश्व भारत संवरा है, आंक रहा है खुद को पल-पल...सुनाकर भारत की बढ़ती शक्ति के दर्शन कराए।
मशहूर कश्मीरी कवि निदा नवाज ने कश्मीर के दर्द को शब्दों से उकेरा। अधेरे की पाजेब पहने आती है काली गहरी रात...समेत उन्हाेंने दो कविताएं पढ़ीं। वहीं, चंदन द्विवेदी ने जम्मू से प्यार कविता के जरिए अपने भावों को शब्द दिए।
इन्होंने भी पढ़ीं रचनाएं...
उपेंद्र पांडेय, शैलेंद्र मधुर, राज कौशिक, डॉ. आभा श्रीवास्तव, अफजल खान, संजीव, डॉ. सतीश विमल, शेख मोहम्मद, यशपाल यश, संतोष सिंह।
कवि सम्मेलन शुरू, माइक बंद
एलजी का भाषण समाप्त होते ही जब कवि सम्मेलन शुरू हुआ तो माइक बंद हो गया। कवयित्री ने जब बगैर माइक के ही कविता पढ़ने की बात कही तो कुछ देर बाद इसे दुरुस्त किया गया। कवि चंदन स्वप्निल चार मुक्तक पढ़ना चाहते थे, लेकिन मंच संचालन कर रहे कवि ने उन्हें कम समय का हवाला देते हुए यह कहकर रोक दिया कि अगली बार भी आना है, एक ही मुक्तक पढ़ दीजिए।