वृंदावन से पधारे हुए कथावाचक श्री ठाकुर शास्त्री जी महाराज श्रद्धालुओं को श्री राम कथा सुनाते ह
- फोटो : वृंदावन से पधारे हुए कथावाचक श्री ठाकुर शास्त्री जी महाराज श्रद्धालुओं को श्री राम कथा सुनाते हुए तथा उपस्थित श्रद्धालु।
सुंदरबनी। सद्गुरु काशी गिरी जी बाणगंगा आश्रम बनपुरी में चल रही श्रीराम कथा के सातवें दिन सोमवार को ठाकुर शास्त्री ने कहा कि विवाह का उद्देश्य भोगों की प्राप्ति नहीं, बल्कि ईश्वर प्राप्ति है।
जीव की सबसे बड़ा शत्रु कामवासना होती है। इसको नियंत्रित करने के लिए विवाह किया जाता है। एक पत्नीव्रत धर्म का पालन करते हुए कामवासना पर नियंत्रण करके यह जीव भगवत प्राप्ति के मार्ग की ओर बढ़ सकता है। उन्हाेंने कहा कि आज समाज में सास बहू का झगड़ा, बाप बेटे का झगड़ा व परिवार में एकता का अभाव अनेक बुराइयों ने जन्म ले लिया है। इसका एकमात्र कारण है श्री राम कथा को ठीक से नहीं सुनाना और न समझना। राम कथा के माध्यम से बताया गया कि राजा जनक ने अपनी बेटियों को विदा करते समय यही शिक्षा दी थी कि आज से आपके सास ससुर ही आपके मां-बाप हैं। उनको परमात्मा मानकर उनकी सेवा करना ही आपका परम कर्तव्य है। इधर महाराज दशरथ ने अपनी रानियाें को यही शिक्षा दी कि ये बेटियां अपना घर देश छोड़कर आई हैं। इनको वैसा ही प्रेम मिलना चाहिए, जैसा प्रेम मां-बाप अपनी बेटी को करते हैं। जहां बेटी और बहू में अंतर समझा जाएगा, उस समाज का कभी उत्थान नहीं हो सकता। युवा वर्ग को चेतावनी देते हुए ठाकुर शास्त्री ने कहा कि यदि आपने अपने बड़ों का सम्मान नहीं किया तो आपका भी बुढ़ापा निश्चित है। आपकी संतान बुढ़ापे में आपका भी सम्मान नहीं करेगी। इस दौरान सीताराम विवाह उत्सव मनाया गया।