संवाद न्यूज एजेंसी
रामगढ़। बाबा चमलियाल की मजार पर 26 जून को वार्षिक मेला लगेगा। बताया जा रहा है कि इस बार भी पाक रेंजर मेले में शिरकत नहीं करेंगे।
भारत-पाक बंटवारे के पहले से ही यह मेला लगता आ रहा है। बंटवारे के बाद 1965, 1971 व 1999 में कारगिल युद्ध हुआ। कई बारा दोनों देशों में तनाव हुआ। लेकिन, बाबा चमलियाल के प्रति दोनों देशों के लोगों की आस्था बनी रही। 2002 में दोनों देशों में तनाव के चलते मेला मजार स्थल से दो किमी पीछे गांव दग-छन्नी में लगाया गया। इसमें पाक रेंजर्स अधिकारियों ने शिरकत नहीं की थी। 2018 में भी मेला पारंपरिक रीति से संपन्न नहीं हो पाया था। मेले से छह दिन पूर्व पाकिस्तान की फायरिंग में बीएसएफ के चार जवानों की शहादत के बाद बीएसएफ ने पाक रेंजरों को न्यौता नहीं दिया था, न ही पाकिस्तान से मजार पर चढ़ाने के लिए चादर आई। कोरोना काल में 2020 व 2021 में मेला स्थगित कर दिया गया था। परंपरा को ही निभाया था।
सूत्रों के अनुसार इस बार भी पाक रेंजर मेले में शिरकत नहीं करेंगे। न ही पाकिस्तान से बाबा की मजार पर चढ़ाने के लिए चादर आएगी। पाकिस्तान के श्रद्धालुओं को मजार से शरबत-शक्कर नसीब नहीं होगी। क्योंकि भारत सरकार ने पाक को मेले का निमंत्रण नहीं दिया है। गांव के पूर्व सरपंच ओम प्रकाश, सन्नी चौधरी, बिल्लू चौधरी ने बताया कि मेले की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। अभी से रोजाना हजारों श्रद्धालु बाबा के स्थान पर आकर माथा टेक रहे हैं।