श्रीनगर। डाउनटाउन इलाके में हरि पर्वत पहाड़ी स्थित शारिका देवी मंदिर में शनिवार को 90 के दशक के पहले जैसे दृश्य देखने को मिले, जब बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडित समुदाय के लोगों ने नवरेह पर विशेष पूजा अर्चना की। इस मौके पर कश्मीरी पंडित समुदाय के लोगों ने घर वापसी के लिए विशेष प्रार्थना भी की। पूजा अर्चना में भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी शामिल हुए।
नवरेह हिंदू धर्म के अनुसार नए साल का पहला दिन होता है। स्थानीय लोगों के अनुसार पलायन से पहले इस मंदिर के आसपास रहने वाले पंडित इस मंदिर में सुबह की प्रार्थना के साथ दिन की शुरुआत करते थे। स्थानीय निवासी मकबूल अहमद नामी के अनुसार उस समय के जो कश्मीरी पंडित थे, जो यहां रहते थे वह न केवल शारिका देवी मंदिर बल्कि मंदिर से सटे मकदूम साहब की दरगाह भी जाते थे। उन्होंने कहा कि कई वर्षों बाद ऐसी रौनक यहां देखने को मिली। पुरानी यादें ताजा हो गईं।
पूजा में शामिल होने जम्मू से पहुंची जिम्मी ने कहा, हम अपने को धन्य समझते हैं कि शारिका मां का बुलावा आया। 32 साल के बाद हम फिर से वापस आए हैं। मैं 7 साल की थी, जब हम यहां से निकले थे। उम्मीद है कि हिन्दू-मुसलमान मिलकर दूरियों को खत्म करेंगे। पुलवामा वेसु से पहुंचे एक अन्य कश्मीरी पंडित राकेश कौल ने कहा कि 32 साल बाद वही कश्मीरियत के दृश्य देखने को मिले।
नए साल के साथ एक नए युग की है शुरूआत
कश्मीरी पंडित नेता डॉ संदीप मावा ने कहा कि हम आतंकवाद मुक्त और अखंड भारत की ओर बढ़ें, इसके लिए प्रार्थना कर रहे हैं। समारोह में विशेष रूप से पहुंचे सुब्रह्मण्यम स्वामी ने कहा कि 32 साल के बाद पहली बार हिंदुओं को यह अधिकार और अवसर मिला है। अब रुकना नहीं है। अब हम आगे बढ़ेंगे, एक साथ होकर। कार्यक्रम के आयोजक सतीश महलदार ने कहा कि यह खुशी की बात है कि आज हम फिर से माता शारिका के आशीर्वाद से यहां आए हैं। नए साल पर हम शांति और खुशी की प्रार्थना कर रहे हैं। नवरेह मिलन केवल नए साल की शुरुआत ही नहीं है, बल्कि एक नए युग की शुरुआत है।