मीरा साहिब में दीये बनाता कुम्हार।
दीपों के उत्सव दीपावली को लेकर बाजार में काफी चहल-पहल होने लगी है। दूसरी तरफ से कुम्हार भी इस प्रयास में लग हुए हैं कि उनकी दीपावली कहीं फीकी न रह जाए। दूसरी तरफ तरफ मां लक्ष्मी और दूसरे देवी देवताओं की आरती के लिए जलाए जाने वाले दीपक और घर को रोशन करने के लिए दीपक की कमी न हो जाए। कुम्हार दीपावली के लिए दीपक तैयार करने लगे हुए हैं।
दीपावली पर्व को लेकर हर ओर खुशी और उल्लास दिखाई देने लगा है। इस त्योहार में मिठाई, ड्राई फ्रूट, फल, कपड़े, आभूषण, खानपान, बर्तन समेत अनेक सामान की खरीदारी होती है। दूसरी तरफ इस पर्व में दीपक का विशेष महत्व है। कस्बे में कुम्हार दीपावली पर दीपक से घरों को रोशन करने के लिए तैयारी में जुट गए हैं। साथ ही बाजार में भी यह बिकने शुरू हो चुके हैं। करवाचौथ के लिए भी करवे और बड़े साइज के दीपक तैयार हो गए हैं। विभिन्न साइज के दीपक गढ़ने में जुटे कुम्हार इन दिनों रात दिन काम कर रहे हैं।
मीरां साहब कस्बे के गांव के साथ सटा गांव बन सुल्तान में बरसों से दीपक बना रहे कुम्हार लालचंद का कहना है कि ढाई से तीन हजार रुपये में चिकनी मिट्टी की ट्राली रेत खरीदकर दिए बनाकर कुम्हार मुनाफा नहीं कमा रहा। अपनी संस्कृति, रीति-रिवाज को जीवंत रखने का प्रयास कर रहा है। आज से 20-30 वर्ष पहले जहां कुम्हारों को आस-पास की जगह से ही दिए बनाने के लिए चिकनी मिट्टी आसानी से उपलब्ध हो जाती थी। अब इस मिट्टी की मोटी कीमत चुकानी पड़ती है। इस मिट्टी से तैयार एक 2 रुपये के दीपक को खरीदते समय लोग मोल-भाव भी करना नहीं भूलते। क्योंकि काफी कम कीमत होने पर अब रोजी-रोटी चलना भी मुश्किल हो गया है।
कुम्हार बालकृष्ण का कहना है कि केंद्र की सरकार द्वारा कुमारों को निशुल्क चाक मुहैया करवाए जाने की योजना होने पर इसका लाभ नहीं मिल पाया। उन्होंने कहा कि जिलाधीश जम्मू कार्यालय के चक्कर लगाने के बावजूद भी निराशा ही हाथ लगी।